Buy Jad । जड़, 9788119555994 at Best Price Online - Buy Books India

Jad । जड़

Author :

Shridhara Banavasi

,

Kiran Ayyar V (translator)

Publisher:

HIND YUGM

Rs339 Rs399 15% OFF

Availability: Available

Shipping-Time: Usually Ships 3-5 Days

    

Rating and Reviews

0.0 / 5

5
0%
0

4
0%
0

3
0%
0

2
0%
0

1
0%
0
Publisher

HIND YUGM

Publication Year 2026
ISBN-13

9788119555994

ISBN-10 8119555996
Binding

Paperback

Number of Pages 296 Pages
Language (Hindi)
Weight (grms) 230
Subject

Indian Writing

समाज की जड़ों में फैली क्रूरता, अन्याय और अमानवीय व्यवस्था के बीच भी कुछ लोग परिस्थितियों से टूटते नहीं, बल्कि संघर्षों के बीच अपनी उम्मीद और मानवता को जीवित रखते हैं। ‘जड़’ ऐसे ही पात्रों की संवेदनशील और प्रेरणादायी कथा है, जो बाहरी और भीतरी संघर्षों से जूझते हुए अपने अस्तित्व, आत्मसम्मान और सपनों को बचाए रखने का साहस करते हैं। कभी वे कमज़ोर पड़ते हैं, तो कभी अपनी जड़ों से शक्ति पाकर फिर खड़े हो जाते हैं।

यह उपन्यास केवल समाज की विसंगतियों और अन्याय का चित्रण नहीं करता, बल्कि दिखाता है कि बुराई के विरुद्ध संघर्ष विनाश नहीं, परिवर्तन और आत्मजागरण का मार्ग भी बन सकता है। इसमें पुरुषार्थ चतुष्ट्य, विश्वमानव की अवधारणा, अध्यात्म का मधुर रस, समाजसेवा की भावना और बुद्ध की करुणामयी वाणी जैसे तत्व प्रभावशाली रूप में उभरते हैं। प्रेम, वात्सल्य, करुणा, त्याग, स्वार्थ, घृणा और मानवीय दुर्बलताओं को संवेदनशीलता से अभिव्यक्त करती यह कृति धर्मांधता, जातिभेद, व्यभिचार और सामाजिक कुरीतियों पर तीखा प्रहार करते हुए पाठक को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती है।

‘जड़’ केवल एक सामाजिक उपन्यास नहीं, बल्कि वर्तमान समय का जीवंत दस्तावेज़ है, जो शांति, सह-अस्तित्व, मानवीय मूल्यों और जीवन की जड़ों से जुड़ने का संदेश देता है। यह कृति पाठक के अंतर्मन को झकझोरते हुए उसे संघर्ष, संवेदना और मानवता के नए अर्थों से परिचित कराती है तथा एक बेहतर और अधिक मानवीय समाज की संभावना को उजागर करती है।

Shridhara Banavasi

श्रीधर बनवासी कन्नड़ साहित्य के सृजनशील रचनाकारों में से एक हैं। ‘अम्मन ऑटोग्राफ़’, ‘देवरा जोळिगे’, ‘ब्रिटिश बंग्ले’ और ‘जयंतीपुरदा कथेगळु’ जैसी रचनाओं के माध्यम से कन्नड़ कथा साहित्य में उन्हें एक महत्वपूर्ण कथाकार के रूप में पहचान मिली है। उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग, पत्रकारिता और जनसंचार की पढ़ाई की है तथा कई वर्षों तक मीडिया क्षेत्र में काम करते रहे हैं। एक कथाकार के रूप में, उन्होंने केंद्र साहित्य अकादमी के ‘कथासंधि’ कार्यक्रम में कहानियों का वाचन किया है। इसके अलावा, उन्होंने 2018 और 2019 में नई दिल्ली में केंद्रीय साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित ‘युवा साहिती:नई फसल’ कार्यक्रम में कथावाचन तथा संवादों में भाग लिया। कई अन्य भाषाओं में उनकी कहानियों का अनुवाद हो चुका है तथा उन्हें विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में भी शामिल किया गया है। ‘तिगरिया हूगळु’, ‘बित्तिदा बेंकी’ और ‘पूर्णचंद्रनिगे मुखवाड़विल्ला’ उनके प्रसिद्ध काव्य संग्रह हैं। उनके उपन्यास ‘बेरु’ को कई पुरस्कार मिल चुके हैं, जिनमें केंद्रीय साहित्य अकादमी का युवा पुरस्कार, कुवेंपु पुरस्कार और राज्य साहित्य अकादमी का पुस्तक पुरस्कार शामिल हैं। उन्होंने लघु कथाएँ, कविताएँ, उपन्यास, नाटक, आत्मकथाएँ, अनुवाद, स्तंभ लेखन और पुस्तक संपादन सहित 15 रचनाएँ प्रकाशित की हैं।

Kiran Ayyar V (translator)

डॉ. किरण अय्यर वी. वर्तमान में चेन्नई स्थित कर्मचारी राज्य बीमा निगम के क्षेत्रीय कार्यालय में सहायक निदेशक (राजभाषा) के पद पर कार्यरत हैं। दक्षिण भारतीय भाषाओं और हिंदी के समन्वय हेतु लेखन व अनुवाद में उनकी विशेष रुचि है। उन्होंने विज्ञान में स्नातक, भौतिक विज्ञान एवं हिंदी में स्नातकोत्तर (स्वर्ण पदक), बी.एड., एम.फिल., पीएच.डी., अनुवाद डिप्लोमा, हिंदी टंकण, आशुलिपि तथा संस्कृत आदि में विभिन्न उपाधियाँ प्राप्त की हैं। उन्होंने भौतिक विज्ञान में इलेक्ट्रॉन अंतः क्रियाओं पर शोधकार्य के साथ साथ कई पुरस्कृत तकनीकी लेख प्रकाशित किए हैं। वे मैसूर के विभिन्न कालेजों में सात वर्षों तक भौतिक विज्ञान के अध्यापक रहे। उनकी रचनाएँ, कविताएँ, लेख, पुस्तक समीक्षाएँ एवं अनुवाद विभिन्न विभागों व संस्थानों की प्रतिष्ठित साहित्यिक तथा तकनीकी पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित व पुरस्कृत होते रहे हैं। उन्होंने ‘आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस’ पुस्तक का संपादन तथा तमिल कवि पिच्चिनिक्काडु इळंगो के काव्य-संग्रह का हिंदी अनुवाद ‘रंगों को चहकने दो’ शीर्षक से किया है। भाषा-सौहार्द, हिंदी प्रचार, संगीत, नृत्य और कन्नड़ साहित्य के तुलनात्मक अध्ययन में भी उनकी विशेष रुचि है। देश में भाषा संबंधी भेदभावों को मिटाने में वे सदा प्रयत्नशील रहते हैं।
No Review Found
Similar Books