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Nastik Ki Prarthana। नास्तिक की प्रार्थना

Author :

Manav Kaul

Publisher:

HIND YUGM

Rs169 Rs199 15% OFF

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Publisher

HIND YUGM

Publication Year 2026
ISBN-13

9788119555703

ISBN-10 8119555708
Binding

Paperback

Language (Hindi)
Subject

Indian Writing

नास्तिक की प्रार्थना मानव कौल का कविता-संग्रह है। कविताओं की ओर लौटने, अपने भीतर के घर में वापस आने और बरसों से बची हुई बात को कह पाने की बेचैनी से जन्मी किताब।

मानव कौल ने अपनी रचनात्मक यात्रा की शुरुआत कविताओं से की थी। फिर नाटक, कहानियाँ और उपन्यास लिखते-लिखते वे अपनी ही भाषा से जैसे कुछ दूर चले गए। भीतर एक भूख बनी रही, घर लौटने की, अपनी पहली आवाज़ तक पहुँचने की। उनके लिए यह घर कविताएँ थीं।

एक उपन्यास पर काम करते हुए जब उसका अंत एक कविता में खुला, तब उन्हें लगा कि वे फिर अपने घर के आसपास हैं, उसकी गलियों, आँगन और गंध के पास। उसी क्षण से कविताएँ लौटने लगीं। यह संग्रह उसी लौटने की यात्रा है।

‘नास्तिक की प्रार्थना’ उन कविताओं की किताब है, जो ‘कुछ कहना छूट गया है’ की टीस और भूख से निकली हैं। इसमें आत्मीयता है, बेचैनी है, स्मृति है और वह स्वाद है, जो लंबे समय बाद घर के खाने में मिलता है।

यह संग्रह पाठक को भी अपने भीतर के किसी पुराने, भूले हुए घर तक ले जा सकता है।

Manav Kaul

कश्मीर के बारामूला में पैदा हुए मानव कौल की परवरिश मध्य प्रदेश के होशंगाबाद में हुई। 2004 में \'अरण्य’ नाम के एक ख़्वाब का जन्म हुआ। मानव के क़ाबिल निर्देशन में \'शक्कर के पाँच दाने’ और \'पार्क’ जैसे नाटकों के साथ \'अरण्य’ ने तेज़ी से देश-विदेश के थिएटर सर्किट में माक़ूल जगह बनाई। \'पीले स्कूटर वाला आदमी’ नाटक में मानव ने अपने लेखन में उस काव्यात्मक लहज़े और अंदाज़ को अपनाया जिसकी तुलना आलोचकों ने निर्मल वर्मा और विनोद कुमार शुक्ल की लेखन-शैली से की। 2003 में \'जजंत्रम ममंत्रम’ से फ़िल्मी करियर की शुरुआत हुई। 2013 में रिलीज़ हुई फ़िल्म \'काई पो चे’ में इनके अभिनय को ख़ूब सराहना मिली। 2016 में \'वज़ीर’ और \'जय गंगाजल’ में बड़े पर्दे पर इनके अभिनय की ख़ूब चर्चा रही। इनकी पहली किताब \'ठीक तुम्हारे पीछे’ साल 2016 की सर्वाधिक पसंद की गई कहानियों की किताब रही। यह इनकी दूसरी किताब है।
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