| Publisher |
HIND YUGM |
| Publication Year |
2023 |
| ISBN-13 |
9789392820410 |
| ISBN-10 |
9392820410 |
| Binding |
Paperback |
| Edition |
3rd |
| Number of Pages |
224 Pages |
| Language |
(Hindi) |
नई बात कहने की तलाश में किसी भी कहानी के पहले एक लंबी गहरी चुप होती है। हम उसे सन्नाटा नहीं कह सकते हैं। कोरे पन्ने और भीतर पल रहे संसार के बीच संवादों का जमघट लगा होता है। बहुत देर से चली आ रही चुप में संघर्ष नई बात कहने के आश्चर्य का चल रहा होता है। इस चुप और शांत दिख रहे तालाब के भीतर पूरी दुनिया हरकत कर रही होती है। नया कहने में कुछ नए शब्द मुँह से निकलते हैं, पर उन शब्दों में जिए हुए का वज़न कम नज़र आता है। कुछ भी नया कहाँ से आता है? हमारे जिए हुए से ही। पर हमारे जिए हुए की भी एक सीमा है। हमारे जिए हुए के तालाब का दायरा छोटा होता है शायद इसीलिए किसी भी क़िस्म के नए अनुभव का टपकना कभी हमारे कहे में बड़े वृत्त नहीं बना पाता है।
Manav Kaul
कश्मीर के बारामूला में पैदा हुए मानव कौल की परवरिश मध्य प्रदेश के होशंगाबाद में हुई। 2004 में \'अरण्य’ नाम के एक ख़्वाब का जन्म हुआ। मानव के क़ाबिल निर्देशन में \'शक्कर के पाँच दाने’ और \'पार्क’ जैसे नाटकों के साथ \'अरण्य’ ने तेज़ी से देश-विदेश के थिएटर सर्किट में माक़ूल जगह बनाई। \'पीले स्कूटर वाला आदमी’ नाटक में मानव ने अपने लेखन में उस काव्यात्मक लहज़े और अंदाज़ को अपनाया जिसकी तुलना आलोचकों ने निर्मल वर्मा और विनोद कुमार शुक्ल की लेखन-शैली से की। 2003 में \'जजंत्रम ममंत्रम’ से फ़िल्मी करियर की शुरुआत हुई। 2013 में रिलीज़ हुई फ़िल्म \'काई पो चे’ में इनके अभिनय को ख़ूब सराहना मिली। 2016 में \'वज़ीर’ और \'जय गंगाजल’ में बड़े पर्दे पर इनके अभिनय की ख़ूब चर्चा रही। इनकी पहली किताब \'ठीक तुम्हारे पीछे’ साल 2016 की सर्वाधिक पसंद की गई कहानियों की किताब रही। यह इनकी दूसरी किताब है।
Manav Kaul
HIND YUGM