Buy Jeevan Ko Badal Dene Wale Mahamantra (Hindi), 9789373170121 at Best Price Online - Buy Books India

Jeevan Ko Badal Dene Wale Mahamantra (Hindi)

Author :

Sakshi Shree

Publisher:

Manjul Publishing House Pvt Ltd

Rs337 Rs450 25% OFF

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Publisher

Manjul Publishing House Pvt Ltd

Publication Year 2026
ISBN-13

9789373170121

ISBN-10 9373170120
Binding

Paperback

Number of Pages 420 Pages
Language (Hindi)
Weight (grms) 300
Subject

Self Help And Personal Development

मैं नहीं चाहता था कि यह गीता पर लिखी गई एक और पुस्तक मात्र बनकर रह जाए—सदियों से इस कालजयी संवाद पर असंख्य ग्रंथ लिखे जा चुके हैं। मैं चाहता था कि यह तब आपके कंधे पर एक कोमल स्पर्श बने, जब संसार आपको अभिभूत कर देता है। मैं चाहता था कि यह भ्रम, थकान और मौन खोज के क्षणों में आपके हृदय से बात करे। उसकी प्रज्ञा के विशाल सागर से, मैंने जीवन-परिवर्तनकारी दस सूक्त अर्थात महामंत्र निकाले हैं। ये अनुष्ठानिक मंत्र नहीं हैं, बल्कि जीवन के निचोड़े हुए, आत्मा को नवजीवन देने वाले सिद्धांत हैं, जिनमें से प्रत्येक में हमारे जीने के ढंग को इन उथल-पुथल भरे समयों में मार्गदर्शन और रूपांतरित करने की शक्ति निहित है। ये आपको प्रवचन देने के लिए नहीं हैं, बल्कि आपको प्रेरित करने के लिए हैं—ठीक एक मित्र की भाँति। ये केवल पढ़े जाने के लिए नहीं, बल्कि स्मरण किए जाने और जिए जाने के लिए ऐसी पंक्तियाँ हैं जो प्रतीक्षा कर रही हैं। यह पुस्तक उपदेश देने का लक्ष्य नहीं रखती। यह आपके साथ-साथ चलने की कामना करती है—जैसे श्रीकृष्ण अर्जुन के साथ चले थे। यह कोमलता से मार्गदर्शन करने की आकाँक्षा रखती है, आपको स्मरण कराते हुए कि वह सारी स्पष्टता, साहस और प्रज्ञा, जिसकी आप खोज में हैं, पहले से ही आपके भीतर विद्यमान है। इसलिए धीरे-धीरे पढ़िए। गहराई से आत्मसात कीजिए और गीता के इन रूपांतरण के स्पर्श-पत्थरों को न केवल अपने मन में, बल्कि अपने संपूर्ण जीवन में प्रकट होने दीजिए।

Sakshi Shree

साक्षी श्री (जन्म से नाम राम श्रीकृष्ण उपाध्याय) एक प्रबुद्ध गुरु एवं गृहस्थ हैं, जो भगवद्गीता की प्रज्ञा को साक्षी—आंतरिक प्रेक्षक—के रूप में जीते हैं। बाल्यकाल में ही आत्मज्ञान से धन्य होकर, उन्होंने एक लोक सेवक के रूप में भारत की सेवा की, जिससे उन्हें समाज के हर वर्ग को प्रत्यक्ष रूप से जानने का अवसर मिला। यह दुर्लभ त्रिवेणी—प्रारंभिक आध्यात्मिक जागृति, गृहस्थ जीवन और लोक सेवा—उनकी वाणी को करुणामयी, व्यावहारिक और विश्वव्यापी बनाती है। स्वामी सुदर्शनाचार्य जी महाराज द्वारा दीक्षित, साक्षी श्री एक ऐसी जीवंत परंपरा के वाहक हैं जिसकी पहुँच समकालीन है। वे किसी धर्म विशेष की शिक्षा नहीं देते; वे दर्शनों का सर्वोत्तम सार प्रस्तुत करते हैं ताकि उनके संपर्क में आने वाले लोगों का जीवन बेहतर हो सके। वे हर पृष्ठभूमि के जिज्ञासुओं को उनके सामान्य जीवन की स्वतंत्रता के बीच अपनी सर्वोच्च क्षमता को साकार करने के लिए मार्गदर्शन देते हैं। दशकों के मार्गदर्शन के दौरान, उन्होंने विश्व भर में लाखों लोगों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डाला है। वे अपनी उस यथार्थ अंतर्दृष्टि के लिए व्यापक रूप से श्रद्धेय हैं, जिसके द्वारा वे बिना पूछे ही किसी की भी चिंताओं को समझ लेते हैं और स्पष्ट व सामयिक समाधान प्रदान करते हैं। साइंस डिवाइन फाउंडेशन के संस्थापक के रूप में, वे आध्यात्मिकता, शि क्षा और सामाजिक पहलों के माध्यम से वंचितों की सहायता करते हैं। अंग्रेजी, संस्कृत और हिदी में पारंगत, साक्षी श्री विभिन्न संस्कृतियों और समय-सीमाओं से परे सहज सुलभ हैं—वे लोगों से वहीं मिलते हैं जहाँ वे हैं और वह भी आत्मीयता, स्पष्टता और स्थिर कृपा के साथ। वे अपने स्वयं के दर्शन का एक जीवंत उदाहरण हैं : संसार में स्थित, भीतर से मुक्त और सेवा में अटूट। "भगवद्गीता" में निहित, इस पुस्तक के जीवन-रूपांतरकारी महामंत्रों का उद्देश्य व्यावहारिक प्रज्ञा को जागृत करना है—ताकि प्रत्येक जिज्ञासु अपनी सर्वोच्च क्षमता को प्राप्त कर सके।
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