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Jeevan Prabandhan : Kripa Karahu Guru Dev Ki Naain

Author :

Vijayshankar Mehta

Publisher:

Radhakrishna Prakashan

Rs224 Rs299 25% OFF

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Publisher

Radhakrishna Prakashan

Publication Year 2022
ISBN-13

9788183614252

ISBN-10 8183614256
Binding

Paperback

Number of Pages 231 Pages
Language (Hindi)
Dimensions (Cms) 22.5 X 14.5 X 2
Subject

Lifestyle & Personal Style Guides

करोड़ों लोगों के लिएश्रीहनुमान चालीसानित्य परायण का साधन है। कइयों को यह कण्ठस्थ है पर अधिकांश ने यह जानने का प्रयत्न नहीं किया होगा कि इन पंक्तियों का गूढ़ अर्थ क्या है। गोस्वामी तुलसीदास जी ने अपना सारा साहित्य प्रभु को साक्षात् सामने रखकर लिखा है। उनका सारा सृजन एक तरह से वार्तालाप है। श्रीहनुमान जी से उनकी ऐसी ही एक निजी बातचीत का एक लोकप्रिय जनस्वीकृत नाम हैश्रीहनुमान चालीसा।आज के मानव के लिए अच्छा, सहज, सरल और सफल जीवन जीने के सारे संकेत हैं इस चालीसा में। ज्ञान के सागर में डुबकी लगाकर, भक्ति के मार्ग पर चलते हुए, निष्काम कार्ययोग को कैसे साधा जाए, जीवन में इसका सन्तुलन बनाती हैश्रीहनुमान चालीसा जिसे पढ़ने के बाद यह समझ में जाता है कि श्रीहनुमान जीवनप्रबन्धन के गुरु हैं। जीवनप्रबन्धन का आधार है स्वभाव और व्यवहार। आज के समय में बच्चों को जो सिखाया जा रहा है, युवा जिस पर चल रहे हैं, प्रौढ़ जिसे जी रहे हैं और वृद्धावस्था जिसमें अपना जीवन काट रही है, वह समूचा प्रबन्धनव्यवहारपर आधारित है। जबकि जीवनप्रबन्धन के मामले मेंश्रीहनुमान चालीसा’ ‘स्वभावपर जोर देती है। व्यवहार से स्वभाव बनना आज के समय की रीत है, जबकि होना चाहिए स्वभाव से व्यवहार बने। जिसका स्वभाव सधा है, उसका हर व्यवहार सर्वप्रिय और सर्वस्वीकृत होता है। स्वभाव को कैसे साधा जाए, ऐसे जीवनप्रबन्धन के सारे सूत्र हैंश्रीहनुमान चालीसाकी प्रत्येक पंक्ति में...

Vijayshankar Mehta

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