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| Publisher | Yuvaan Books |
| ISBN-13 | 9788198146328 |
| ISBN-10 | 8198146326 |
| Binding | Paperback |
| Edition | 2026 |
| Number of Pages | 248 Pages |
| Language | (Hindi) |
| Subject | Novel |
कंकाल जयशंकर प्रसाद का पहला उपन्यास है। इसका रचनाकाल 1929 है। इस लिहाज से देखें तो यह सदी भर पुराना उपन्यास है। किसी पाठक के मन में यह सहज ही आ सकता है कि इतने पुराने उपन्यास में उसके लिए क्या होगा? इस उपन्यास को पढ़ते हुए आपके सामने अपना समय भी होगा, आप घटना संदर्भों में समय का अंतराल महसूस करेंगे, लेकिन आप पाएंगे कि मनुष्य की मूलभूत मानसिक वृत्तियाँ इतनी तेज़ नहीं बदलतीं, इसलिए उसके मानसिक संघर्ष भी कम- अधिक वही बने रहते हैं।आप इसमें दर्ज धार्मिक अधःपतन देखेंगे तो आपको अपने समय के बाबा और महंत दिखेंगे। आप धर्म, समाज और नैतिकता के उन मूलभूत प्रश्नों से टकराएंगे, जिनमें आप सामान्यतः उलझे होते हैं, लेकिन धैर्य से सोचने का अवसर नहीं आता।
Jaishankar Prasad
Yuvaan Books