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| Publisher | Yuvaan Books |
| ISBN-13 | 9788198146304 |
| ISBN-10 | 819814630X |
| Binding | Paperback |
| Edition | 2026 |
| Number of Pages | 248 Pages |
| Language | (Hindi) |
| Subject | Novel |
तितली एक ग्राम-कथा है, लेकिन इसे ग्राम्य कथा नहीं समझना चाहिए। इसकी कथा संरचना में भले ही बजरिया, शेरकोट और छावनी हो, वहाँ की गरीबी, जहालत, सामंती शोषण और अंततः ग्राम-सुधार हो, लेकिन जयशंकर प्रसाद इस सब को पश्चिमी और भारतीय जीवन-दर्शन के द्वन्द्व तक ले जाते हैं। तितली और शैला दोनों ही खुद को अलग दिशाओं में खोज रही हैं, लेकिन अंततः दोनों जहाँ पहुँचती हैं, वहाँ एक-दूसरे के करीब लगती हैं। तितली तो हिन्दी उपन्यासों के अमर चरित्रों में से एक है। लगभग सदी भर पहले का यह उपन्यास घटना संदर्भों में पीछे का लेकिन चरित्रों के मानसिक संघर्षों में यह एकदम समकालीन लगेगा।
Jaishankar Prasad
Yuvaan Books