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Kavi Ki Preyasi

Author :

Ilachandra Joshi

Publisher:

LOKBHARTI PRAKASHAN

Rs135 Rs150 10% OFF

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Publisher

LOKBHARTI PRAKASHAN

Publication Year 2016
ISBN-13

9789352211074

ISBN-10 9352211073
Binding

Paperback

Number of Pages 200 Pages
Language (Hindi)
Dimensions (Cms) 22 X 14 X 1.5
Weight (grms) 300
Subject

Indian Writing

‘कवि की प्रेयसी’ एक काल्पनिक उपन्यास है जिसमें प्रसिद्ध उपन्यासकार इलाचन्द्र जोशी ने अपनी सशक्त लेखनी के माध्यम से अपने ही एक परिचित मित्र के पूर्व जन्म की कहानी का चित्रण किया है। इसमें वर्णित प्रसंगों की सटीकता प्रमाणित करने के लिए किसी पुरातत्त्वेत्ता की दृष्टि को व्यर्थ प्रयत्न करने की आवश्यकता नहीं है। इस उपन्यास में पात्रों के मनोभावों को बड़ी सटीकता और सघनता से लिखा गया है जिससे कोई भी संवेदनशील पाठक अछूता नहीं रह सकता। अन्त:बाह्य जीवन के संघर्ष व रोमांचकता से परिपूर्ण सार्थकता को प्रस्तुत करनेवाला यह उपन्यास पाठकों को शुरू से अन्त तक बाँधे रखने में सक्षम है।

Ilachandra Joshi

जन्म : 13 दिसम्बर, 1902; अल्मोड़ा के एक प्रतिष्ठित मध्यवर्गीय परिवार में। सन् 1921 में शरद बाबू से इनकी भेंट हुई। 'चाँद' के सहयोगी सम्पादक रहे और सन् 1929 में ‘सुधा’ का सम्पादन किया। ‘कोलकाता समाचार’, ‘चाँद', ‘विश्वचाणी', ‘सुधा’, ‘सम्मेलन-पत्रिका’, ‘संगम', ‘धर्मयुद्ध' और ‘साहित्यकार' जैसी पत्रिकाओं के सम्पादन से भी जुड़े रहे। पहला उपन्यास जो 1927 में लिखा गया था, सन् 1929 में प्रकाशित हुआ। प्रमुख कृतियाँ : उपन्यास—‘लज्जा’, ‘संन्यासी’, ‘पर्दे की रानी’, ‘प्रेत और छाया’, ‘निर्वासित’, ‘मुक्तिपथ’, ‘सुबह के भूले’, ‘जिप्सी’, ‘जहाज़ का पंछी’, ‘भूत का भविष्य’, ‘ऋतुचक्र’; कहानी—‘धूपरेखा’, ‘दीवाली और होली’, ‘रोमांटिक छाया’, ‘आहुति’, ‘खँडहर की आत्माएँ’, ‘डायरी के नीरस पृष्ठ’, ‘कँटीले फूल लजीले काँटे’; समालोचना तथा निबन्ध—‘साहित्य सर्जना’, ‘विवेचना’, ‘विश्लेषण’, ‘साहित्य चिंतन’, ‘शरतचन्द्र-व्यक्ति और कलाकार’, ‘रवीन्द्रनाथ ठाकुर’, ‘देखा-परखा’। सम्मान : उत्तर प्रदेश शासन द्वारा ‘ऋतुचक्र' उपन्यास पर ‘प्रेमचन्द पुरस्कार’, ‘विशिष्ट पुरस्कार’ सहित कई पुरस्कारों से सम्मानित। सन् 1979 में साहित्य वाचस्पति की उपाधि। विशिष्ट पुरस्कार उत्तर प्रदेश शासन द्वारा 1976-77, साहित्य वाचस्पति की उपाधि 1979 ईं.। निधन : सन् 1982
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