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| Publisher | Prabhat Prakashan |
| Publication Year | 2025 |
| ISBN-13 | 9789355621511 |
| ISBN-10 | 9355621515 |
| Binding | Paperback |
| Number of Pages | 160 Pages |
| Language | (Hindi) |
| Dimensions (Cms) | 22 X 14 X 1.5 |
| Weight (grms) | 150 |
| Subject | Political Leadership |
'लाल समाधि' देश को मिली स्वाधीनता से पहले भारत में जिस कम्युनिस्ट पार्टी का उदय हुआ, उसकी मजबूती से लेकर उसके टूटने और बिखराव का प्रामाणिक दस्तावेज है। इस पुस्तक में लेखक के पत्रकारीय अनुभव का गहरा प्रस्फुटन है। एक पार्टी से टूटते-बिखरते हुए कई दलों के वजूद में आने की वजह और परिस्थितियों का पुस्तक में विवरण है। जबकि इसी साल दो वामपंथी संगठनों के विलय पर भी सार्थक विवेचना पुस्तक में है।
कालांतर में बैलेट की बजाय बंदूक से सत्ता हासिल करने की नक्सली संगठनों की सनक को भी 'लाल समाधि' में तार्किकता के साथ उकेरा गया है। चारू मजुमदार के नेतृत्व में भाकपा माले का गठन तो कन्हाई चटर्जी के नेतृत्व में अस्तित्व में आए माओइस्ट कम्युनिस्ट सेंटर इसी सनक का परिचायक हैं। देश की हिंदी पट्टी, यानी हिंदी भाषा-भाषी क्षेत्रों में वामपंथी संगठनों के उफान से लेकर उतार का विवरण है। साथ ही वाम संगठनों के उतार के कारणों की भी पहचान की गई है। लेखक को दिल्ली से लेकर झारखंड में तीन दशक से अधिक का पत्रकारिता का अनुभव है। 'लाल समाधि' में लेखक का अध्ययन और अनुभव दोनों समन्वित रूप से समाहित हैं।
Dharmaveer Sinha
Prabhat Prakashan