Lamhon Ke Daman Mein । लम्हों के दामन में (Hindi)

Author:

Renu Anshul

Publisher:

Hindi Yugam

Rs100 Rs125 20% OFF

Availability: Available

    

Rating and Reviews

0.0 / 5

5
0%
0

4
0%
0

3
0%
0

2
0%
0

1
0%
0
Publisher

Hindi Yugam

Publication Year 2020
ISBN-13

9788194844419

ISBN-10 819484441X
Binding

Paperback

Edition First
Number of Pages 110 Pages
Language (Hindi)
Dimensions (Cms) 19.8 x 0.8 x 12.9
Weight (grms) 120

कहते हैं कि वक़्त कभी नहीं रुकता, चलता ही रहता है अनवरत। क़दम-क़दम पर अपनी छाप छोड़ते हुए, यादों को सहेजते हुए बढ़ता रहता है आगे। वक़्त के इन्हीं खट्टे-मीठे पड़ावों को, लम्हों को, यादों को समेटने और सहेजने की एक कोशिश हुई है कविता-संग्रह ‘लम्हों के दामन में’ के माध्यम से। अपनी उम्र के चार महत्त्वपूर्ण पड़ावों की तरह ही कवि मन ने अपनी कविताओं में भी कल्पना की है जीवन के उन्हीं चारों पड़ावों की, उन्हीं यादों की, जहाँ कहीं बचपन की अठखेलियाँ हैं तो कहीं सखी-सहेलियाँ। कहीं यादों में कॉलेज के लड़कपन की महक है तो कहीं मुहब्बत और इश्क़ के रंगों से रची-बसी दीवानगी की दुनिया है। कहीं यादें बढ़ती उम्र को समझने की पुरज़ोर कोशिश में ख़ुद से उलझी हुई हैं तो कहीं जीवन के अंतिम मुकाम पर साँसों को और थामने की कोशिश है। इंद्रधनुषी रंगों से रचा-बसा कविता रूपी यादों का यह संसार सभी पाठक को अपना-सा लगेगा।.

Renu Anshul

अपने आसपास और समाज में हो रही घटनाएँ बहुत जल्दी रेनू ‘अंशुल’ के मन को अपने से जोड़ जाती हैं। मानो भीतर तक जुड़कर घट रही हर बात में एक नया किरदार और उसकी कहानी तलाशने लगी हों। थोड़ा-बहुत, जितना भी, जो भी लिखती हैं, बहुत दिल से लिखती हैं और जन-जन को महसूस करके लिखती हैं। लिखना, बोलना, सुनना और पढ़ना इनका ख़ास शौक है। अपने इस शौक को बरसों से दूरदर्शन, ऑल इंडिया रेडियो, पत्र-पत्रिकाओं और मंच के माध्यम से पूरा कर रही हैं और अपनी बात पाठकों, श्रोताओं और दर्शकों तक पहुँचा रही हैं। दो कहानी-संग्रहों के बाद कविता-संग्रह ‘लम्हों के दामन में’ इनका नया और प्रथम प्रयास है। बहरहाल, रेनू ‘अंशुल’ की कोशिश जारी है कि उनका हर विधा में लिखा साहित्य उनके प्रिय पाठकों, श्रोताओं और दर्शकों के दिल तक पहुँच जाए।.
No Review Found
More from Author