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| Publisher | Manjul Publishing House Pvt. Ltd. |
| Publication Year | 2026 |
| ISBN-13 | 9789373170084 |
| ISBN-10 | 9373170082 |
| Binding | Paperback |
| Number of Pages | 152 Pages |
| Language | (English) |
| Subject | Biographies & Autobiographies |
हर काले बादल के पीछे एक उजली किरण छिपी होती है। उस प्रकाश को खोज निकालना हममें से प्रत्येक पर निर्भर करता है। जगदीश अरोरा का सफ़र मध्य प्रदेश के अशोक नगर में एक मामूली घर से शुरू हुआ । पक्के इरादे, ईमानदारी और कड़ी मेहनत में अटूट विश्वास के साथ उन्होंने भारत की सबसे ग़लत समझी जाने वाली इंडस्ट्रीज़ में से एक शराब निर्माण के व्यवसाय — में एक असाधारण विरासत स्थापित की । उनकी ज़िंदगी लगन, दृढ़ विश्वास और अपने हालात से आगे बढ़कर सपने देखने की हिम्मत का प्रमाण है । इस शानदार सफ़र की नींव उनके माता-पिता ने रखी थी। उनकी माँ, आशा रानी अरोरा ने उन्हें स्वतंत्र रूप से सोचना और मज़बूती व दृढ़ संकल्प के साथ ज़िम्मेदारियाँ निभाना सिखाया । उनके पिता, मोहन लाल अरोरा ने उन्हें कड़ी मेहनत, संतोष और अपने वचन का सम्मान करने की सीख दी। इन दोनों ने मिलकर उन्हें अनिश्चितताओं से ऊपर उठने और उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा दी । अपने पूरे सफ़र में जुनून, एकाग्रता, ईमानदारी, दृढ़ संकल्प और कृतज्ञता उनकी सबसे बड़ी ताक़त रहे। उनकी कहानी यह दिखाती है कि सफलता केवल पैसे या उपलब्धियों से नहीं मापी जाती, बल्कि उन उसूलों से मापी जाती है, जिन्हें अपनाकर व्यक्ति उसे हासिल करता है । यह उस दौर की कहानी है, जब भारत में 1970 के दशक में जगदीश अरोरा ने एक ऐसे व्यवसाय में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई, जिसके बारे में उस समय खुलकर बात तक नहीं होती थी। यह एक ऐसे इंसान की कहानी है, जिसने अपनी माँ से किए एक पक्के वादे को निभाते हुए तमाम रुकावटों को पार किया— कि वह अपनी पूरी जिंदगी में कभी शराब का सेवन नहीं करेगा। यह किताब संघर्ष, साहस और मूल्यों की एक प्रेरक कहानी है। यह एक ऐसे बिज़नेसमैन के निर्माण की गाथा है, जिसकी ज़िंदगी यह साबित करती है कि असाधारण उपलब्धियाँ अक्सर सबसे साधारण परिस्थितियों से ही शुरू होती हैं।
Lory Pattanaik
Manjul Publishing House Pvt. Ltd.