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Zindagi Ka Sath Nibhata Chala Gaya (Hindi)

Author :

Rajesh Badal

Publisher:

Manjul Publishing House Pvt. Ltd.

Rs374 Rs499 25% OFF

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Publisher

Manjul Publishing House Pvt. Ltd.

Publication Year 2026
ISBN-13

9789373175737

ISBN-10 9373175734
Binding

Paperback

Number of Pages 384 Pages
Language (Hindi)
Dimensions (Cms) 21 x 14 x 3
Subject

Biographies & Autobiographies

ABOUT THE BOOK

अब्दुल हई एक बच्चे का ऐसा नाम है, जिसे हम लोग नहीं जानते। बाद में यही बच्चा अपनी शायरी के दम पर शब्दों का जादूगर बन बैठा। वह गोरी हुकूमत के एक वफ़ादार सामंत का बेटा था लेकिन पिता उसे अनपढ़ बनाए रखना चाहते थे। उसकी माँ, पति की बारहवीं बीवी थी। उसने बग़ावत कर दी और शौहर की दौलत को ठोकर मार दी। बेटे को लेकर घर छोड़ दिया। मामला अदालत में गया और माँ की जीत हुई। उसने ज़ेवर बेचकर बेटे को पढ़ाया। इसी अब्दुल हई को हम आज साहिर लुधियानवी के नाम से जानते हैं। साहिर के शेर, नज़्में और ग़ज़लें हमें रुलाती हैं, हँसाती हैं और व्यवस्था के प्रति आक्रोश से भर देती हैं। उनके लफ़्ज़ अदब के एक ऐसे लोक में ले जाते हैं, जो नाइंसाफ़ी के विरोध में संसार से टकराने का हौसला रखते हैं और सच के लिए किसी भी हद तक सत्ता से टकराने के लिए तैयार हैं। लेकिन इसी साहिर के अपने रंज ओ ग़म भी कम न थे जिसे कम ही लोग जानते हैं। उनके सीने में दर्द का दरिया बहता था और हम परदे पर उनके गीतों पर झूमते थे। उनकी ज़िंदगी में एक के बाद एक महिलाएं आती रहीं और जाती रहीं मगर उसका घर नहीं बसा पाईं। उनके गीतों और ग़ज़लों में प्यार का सागर हिलोरें मारता था पर मन में दूर-दूर तक सन्नाटा और विकराल रेगिस्तान पसरा हुआ था। इसी सूनेपन को दिल में लिए शायरी का यह सुल्तान एक दिन हमेशा के लिए चला गया। साहिर लुधियानवी का संपूर्ण प्रामाणिक ज़िंदगीनामा पहली बार टीवी के जाने-माने बायोपिक निर्माता व निर्देशक राजेश बादल की इस पुस्तक में आप पढ़ने जा रहे हैं। साहिर की ज़िंदगी के क़िस्से टुकड़ों-टुकड़ों में आधी हक़ीक़त, आधा फ़साना की तरह हमें मिलते रहे और हम उन पर भरोसा करते रहे। क़रीब पंद्रह बरस के गहरे शोध के बाद साहिर की यह दास्तान आपके लिए प्रस्तुत है। हमारा दावा है कि इससे पहले साहिर की समग्र पुख्ता कहानी आपने नहीं पढ़ी होगी। सलाम! साहिर लुधियानवी।

Rajesh Badal

राजेश बादल की पहचान के कर्इ सूत्र हैं। पत्रकार, लेखक, संपादक, चिंतक, विचारक और फ़िल्म निर्माण; ये सब सूत्र उनसे जुड़ते हैं। पैंतालीस बरस पहले दैनिक जागरण से शुरू हुआ उनका सफ़र यूएनआर्इ, पीटीआर्इ, नर्इ दुनिया, नवभारत टाइम्स और रविवार जैसे समाचार-पत्र, पत्रिकाओं के माध्यम से आगे बढ़ा। रेडियो व टेलिविज़न के जरिए पहचान व्यापक हुर्इ। और आज फ़िल्म निर्माण तथा डिज़िटल माध्यम के नए अवतारों के साथ कलात्मक गतिविधियाँ अनवरत जारी हैं। भारतीय टेलिविज़न पत्रकारिता की पहली पीढ़ी के पत्रकारों में से एक। पहले स्वदेशी चैनल आज तक में बतौर संपादक। उत्तर भारत की पहली ख़बरिया टीवी एजेंसी टेली न्यूज़ के प्रधान संपादक, बीएजी फ़िल्म्स के कार्यकारी संपादक, सीएनर्इबी के प्रधान संपादक, इंडिया न्यूज़ के न्यूज़ डायरेक्टर, वॉइस ऑफ़ इंडिया के प्रबंध संपादक और एसोसिएट समूह संपादक। राज्यसभा टीवी के संस्थापक संपादक और कार्यकारी निदेशक। भारत की पहली साप्ताहिक टीवी समाचार पत्रिका परख़ के विशेष संवाददाता, निजी क्षेत्र के पहले दैनिक न्यूज़ बुलेटिन न्यूज़ वेब के विशेष संवाददाता, भारत के पहले टेलिविज़न ट्रैवलॉग में अरुणाचल से कन्याकुमारी तक का सफ़र। राज्यपालों पर केंद्रित पहले समाचार धारावाहिक महामहिम राज्यपाल के एंकर-निदेशक। 1977 से लगातार विधानसभाओं, लोकसभा चुनावों का कवरेज़। रेडियो-दूरदर्शन पर क़रीब पंद्रह बरस समाचार प्रस्तोता और सम-सामयिक कार्यक्रमों के प्रस्तुतकर्ता। अनगिनत वृत्तचित्र और हज़ारों टीवी रिपोर्ट्स। लोकप्रिय टीवी श्रंखला उनकी नज़र, उनका शहर और विरासत के तहत पचास से अधिक विभूतियों पर बायोपिक निर्माण। वॉइस ऑफ़ अमेरिका के लिए सुनामी का ख़ास कवरेज। अमेरिकी सरकार के आमंत्रण पर लंबे समय तक वहाँ मीडिया अध्ययन और अनेक शहरों-संस्थानों में व्याख्यान। आकाशवाणी के एफ़एम गोल्ड चैनल के कर्इ धारावाहिकों में भागीदारी। मीडिया शिक्षा के क्षेत्र में पैंतीस साल से सक्रिय। दो दर्ज़न से अधिक विश्वविद्यालयों में अतिथि व्याख्यान, अनेक विश्वविद्यालयों में बोर्ड ऑफ़ स्टडीज़, पाठ्यक्रम निर्धारण समिति, परीक्षा प्रश्न-पत्र परीक्षक और मूल्यांकन कर्ता। विज्ञान पत्रकारिता के क्षेत्र में अनेक लघु फ़िल्मों का निर्माण। सीएसआर्इआर के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भागीदारी। भोपाल गैस त्रासदी, सुनामी, कश्मीर में भूकंप और नेपाल में भूकंप का वैज्ञानिक कवरेज। आदिवासी संस्कृति पर शोध और अनेक लघु फ़िल्मों का निर्माण। गाँधी दर्शन-चिंतन पर लगातार लेखन। हिंदुस्तान का सफ़र तथा शब्द सितारे पुस्तकों के लेखक। अनेक पुस्तकों में सह-लेखक, अंतरराष्ट्रीय महात्मा गाँधी सम्मान, राष्ट्रीय राजेंद्र माथुर सम्मान, माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता पुरस्कार समेत अनेक सम्मान उन्हें प्राप्त हो चुके हैं। संप्रति : समाचार-पत्र, पत्रिकाओं, न्यूज़ पोर्टल्स के लिए लेखन। मीडिया पर केंद्रित लोकप्रिय स्तंभ मिस्टर मीडिया के लेखक। टीवी चैनलों और अनेक ऑन लाइन वेब चैनलों में भागीदारी। वर्तमान में नर्इ दिल्ली में निवास, लेकिन भोपाल से जुड़ाव के चलते महीनों सुकून के पल यहाँ गुज़ारते हैं।
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