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Naksal Mukt Bharat: Raajneetik Ichchha Shakti Ki Jeet (Hindi)

Author :

TUHIN A SINHA

,

Alok Dwivedi

Publisher:

Manjul Publishing House Pvt. Ltd.

Rs299 Rs399 25% OFF

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Publisher

Manjul Publishing House Pvt. Ltd.

Publication Year 2026
ISBN-13

9789373170435

ISBN-10 9373170430
Binding

Paperback

Number of Pages 292 Pages
Language (Hindi)
Dimensions (Cms) 19.8 x 12.8 x 1.7
Subject

Politics & Government

माओवाद का अंत : एक ऐतिहासिक विजय और 'नक्सल-मुक्त भारत' की विजय गाथा पाँच दशकों तक मध्य भारत को लहूलुहान करने वाला लाल आतंक अब इतिहास के पन्नों में सिमट रहा है। इसने न केवल सरकारी सत्ता को चुनौती दी, बल्कि आदिवासी समुदायों को आतंकित किया और 'क्रांति' के नाम पर उग्रवादी क्रूरता को सामान्य बना दिया। 1967 के नक्सलबाड़ी विद्रोह से शुरू हुई यह हिंसा, जो कभी देश की सबसे बड़ी आंतरिक सुरक्षा चुनौती थी, अब निर्णायक रूप से परास्त हो चुकी है। सुरक्षा, राजनीति और आर्थिक बदलाव का अनूठा संगम, 'नक्सल-मुक्त भारत' राष्ट्रीय सुरक्षा, सुशासन और भारत के विकास पथ में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए एक अनिवार्य अंतर्दृष्टि प्रदान करती है। प्रसिद्ध लेखक और भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता तुहिन ए. सिन्हा और सहलेखक डॉ आलोक कुमार द्विवेदी की पुस्तक 'नक्सल-मुक्त भारत' उस संकल्प की विजय यात्रा है, जिसने 31 मार्च 2026 की समयसीमा तक भारत को नक्सलवाद के दंश से मुक्त करने का मार्ग प्रशस्त किया।

TUHIN A SINHA

Alok Dwivedi

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र में पीएचडी प्राप्त डॉ. आलोक कुमार द्विवेदी वर्तमान में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में कार्य कर रहे हैं। एक युवा और संवेदनशील चिंतक के रूप में उनका मुख्य लक्ष्य शिक्षा के माध्यम से समाज में नैतिक मूल्य-व्यवस्था का निर्माण करना है। वे दर्शन को सैद्धांतिक ज्ञान के बजाय जीवन जीने की कला मानते हैं और इसी दृष्टि से भारतीय ज्ञान परंपरा (आईकेएस) के प्रसार में सक्रिय हैं। उन्होंने विभिन्न संस्थानों में ‘भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्र’ स्थापित कर युवाओं को रामायण, महाभारत और गीता जैसे कालजयी ग्रंथों से जोड़ने का सार्थक प्रयास किया है। नीतिशास्त्र, प्रशासनिक नैतिकता और ‘रामत्व’ की अवधारणा में विशेष रुचि रखने वाले डॉ. द्विवेदी ने देश-विदेश के अनेक मंचों पर अपनी विद्वत्ता प्रस्तुत की है। उनके सत्तर से अधिक शोधपत्र और समसामयिक लेख प्रतिष्ठित समाचार पत्रों व अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में प्रकाशित हो चुके हैं।
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