| Publisher |
HIND YUGM |
| Publication Year |
2025 |
| ISBN-13 |
9788119555031 |
| ISBN-10 |
8119555031 |
| Binding |
Paperback |
| Edition |
1st |
| Number of Pages |
240 Pages |
| Language |
(Hindi) |
अविनाश मिश्र कृत ‘नये शेखर की जीवनी’ का अज्ञेय कृत ‘शेखर : एक जीवनी’ से केवल इतना ही संबंध है कि नये शेखर ने पुराने शेखर से ईमानदारी सीखी है। इस प्रशिक्षण में जीवन घनघोर और नगर शोर हो गए हैं। ‘शेखर त्रयी’ के अंग और अब तक प्रकाशित ‘नये शेखर की जीवनी’ के दो खंडों—‘आगमन’ और ‘प्रस्थान’—में 1986-2036 के बीच के भारतीय नागरिक समय का स्वप्न और दु:स्वप्न, यथार्थ और कल्पना, आदर्श और पतन दर्ज हैं। हिंदी-साहित्य-संसार इस समय के सतत साथ है और घटनाएँ कालानुक्रमिक नहीं हैं। यहाँ घटनाएँ हो चुके समय से लेकर हो रहे समय में और होने वाले समय तक में फैल गई हैं। यह नागरिक समय युवा-उत्तेजना, फ़साद, महामारी, आंदोलन, प्रतिकार के रसायन से बना है। प्रेम यहाँ खो रहा है और होना भी... ‘शेखर त्रयी’ के अंतिम खंड ‘अन्वेषण’ में इस सबके बीच होकर खो चुकी एक रचना की तलाश होगी।
Avinash Mishra
5 जनवरी, 1986 को ग़ाज़ियाबाद में जन्म। शुरुआती शिक्षा और जीवन उत्तर प्रदेश के कानपुर में। आगे की पढ़ाई, लिखाई, संघर्ष और आजीविका के लिए साल 2004 से दिल्ली के आस-पास रहनवारी और बीच-बीच में दिल्ली से दूर प्रवास। कविता,आलोचना और पत्रकारिता के इलाक़े में सक्रिय। कुछ प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में सेवाएँ दीं और लगभग सभी प्रतिष्ठित प्रकाशन माध्यमों पर रचनाएँ और साहित्यिक पत्रकारिता से संबंधित काम प्रकाशित। ‘अज्ञातवास की कविताएँ’ शीर्षक से कविताओं की पहली किताब साहित्य अकादेमी से साल 2017 में और सृजनात्मक गद्य की पहली कृति ‘नए शेखर की जीवनी’ शीर्षक से साल 2018 में प्रकाशित। इन दिनों आलोचना की एक किताब पर काम और विश्व कविता और अन्य कलाओं की पत्रिका ‘सदानीरा’ का संपादन कर रहे हैं।
Avinash Mishra
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