| Publisher |
HIND YUGM |
| Publication Year |
2022 |
| ISBN-13 |
9788195306190 |
| ISBN-10 |
8195306195 |
| Binding |
Paperback |
| Edition |
1st |
| Number of Pages |
232 Pages |
| Language |
(Hindi) |
एक उपन्यासकार का मस्तिष्क बहुत हाल के नहीं अपने पूर्वज उपन्यासकारों के पाठ और कथा-विवेक से बनता है। यहाँ एक सुविधा के लिए मान लीजिए कि अब तक हुए सुप्रतिष्ठित उपन्यासकारों के मार्ग विविध-विभिन्न सही, पर उनका केंद्रीय लक्ष्य एक ही रहा होगा—उपन्यास की अब तक प्रस्तुत-प्रचलित परिभाषाओं, कथाओं और संरचनाओं से बाहर चले जाना। इसमें सफलता या असफलता भविष्य का कष्ट है, लेकिन सार्वजनिक होने के बिल्कुल अंतिम क्षणों तक इस प्रयत्न और प्रक्रिया में बने रहना एक महत्त्वपूर्ण विचार-अनुभव है।
Avinash Mishra
5 जनवरी, 1986 को ग़ाज़ियाबाद में जन्म। शुरुआती शिक्षा और जीवन उत्तर प्रदेश के कानपुर में। आगे की पढ़ाई, लिखाई, संघर्ष और आजीविका के लिए साल 2004 से दिल्ली के आस-पास रहनवारी और बीच-बीच में दिल्ली से दूर प्रवास। कविता,आलोचना और पत्रकारिता के इलाक़े में सक्रिय। कुछ प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में सेवाएँ दीं और लगभग सभी प्रतिष्ठित प्रकाशन माध्यमों पर रचनाएँ और साहित्यिक पत्रकारिता से संबंधित काम प्रकाशित। ‘अज्ञातवास की कविताएँ’ शीर्षक से कविताओं की पहली किताब साहित्य अकादेमी से साल 2017 में और सृजनात्मक गद्य की पहली कृति ‘नए शेखर की जीवनी’ शीर्षक से साल 2018 में प्रकाशित। इन दिनों आलोचना की एक किताब पर काम और विश्व कविता और अन्य कलाओं की पत्रिका ‘सदानीरा’ का संपादन कर रहे हैं।
Avinash Mishra
HIND YUGM