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| Publisher | Unbound Script |
| ISBN-13 | 9789347125126 |
| ISBN-10 | 9347125121 |
| Binding | Paperback |
| Edition | 2026 |
| Number of Pages | 103 Pages |
| Language | (Hindi) |
| Subject | Biographies & Autobiographies |
यह पुस्तक केवल किसी एक राज्य की रानी के उत्थान-पतन की कथा नहीं, बल्कि उस अटूट इच्छाशक्ति का जीवंत दस्तावेज़ है जिसने विश्व के सबसे शक्तिशाली साम्राज्य की नींव हिला दी । काशी की गलियों में जन्मी मनु, बिठूर में शस्त्रों के साये में पली और 'छबीली' से झाँसी की महारानी लक्ष्मीबाई बनी- यह यात्रा साहस, रणनीति और आत्मसम्मान का अद्भुत संगम है। लॉर्ड डलहौजी की साम्राज्यवादी नीतियों के सामने झुकने के बजाय उन्होंने संघर्ष का मार्ग चुना। 1857 की ज्वाला में झाँसी की रक्षा करते हुए लक्ष्मीबाई ने भारतीय मानस में यह विश्वास जगाया कि अग्रेंज़ों को चुनौती दी जा सकती है। गद्दारी और षड्यंत्रों के बीच वीरगति को चुनने वाली यह वीरांगना आज भी स्वाभिमान की अमर प्रेरणा है ।
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