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| Publisher | HIND YUGM |
| Publication Year | 2025 |
| ISBN-13 | 9788119555147 |
| ISBN-10 | 8119555147 |
| Binding | Paperback |
| Number of Pages | 176 Pages |
| Language | (Hindi) |
| Dimensions (Cms) | 22 X 14 X 1.2 |
| Weight (grms) | 150 |
पहाड़ जब मेहमान बनकर कविता के घर आता है तब वह अपने साथ पहाड़ की विडंबनाएँ, उसके दुःख और अंतर्विरोध भी साथ लेकर आता है। अशोक का कवि लोकतंत्र की सँकरी सड़क पर कविता की बांसुरी, पुरखों की बोली ढूँढ रहा है यह जानते हुए भी कि यह समय भाषाओं के अकाल का समय है। ये कविताएँ गहरी संवेदना में डूबकर लिखी गई कविताएँ हैं : “कितनी सर्द है यह दुनिया। आओ पास आओ। थोड़ा ताप दो और बचा लो इसे।” ये कविताएँ समकालीन कविता की दुनिया में अपनी महत्वपूर्ण उपस्थिति दर्ज करेंगी ऐसा मेरा विश्वास है।
—प्रोफ़ेसर कुमार कृष्ण
(हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला)
ASHOK KUMAR
HIND YUGM