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| Publisher | HIND YUGM |
| Publication Year | 2026 |
| ISBN-13 | 9788119555598 |
| ISBN-10 | 8119555597 |
| Binding | Paperback |
| Number of Pages | 160 Pages |
| Language | (Hindi) |
| Dimensions (Cms) | 19.8 x 12.9 x 1.1 |
| Subject | Poetry |
सर्दियों की कड़क धुंध में बैठकर जो कुछ धूप मेरी हथेली में आती थी
मैंने अपनी लकीर से निकालकर
यहाँ इस किताब में
तुम्हारे लिए
रख दी है
अब तुम इसे चाहे
पढ़ो, न पढ़ो
जैसे सूरज, बंद आँखों को भी उजाला दे देता है
रखे रहो इसे अपने पास
किसी दिन किसी पन्ने से
तुम्हें धूप मिलेगी
Vanshika Parmar
HIND YUGM