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Waqt Ka Main Lipik

Author :

Yash Malviya

Publisher:

LOKBHARTI PRAKASHAN

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Publisher

LOKBHARTI PRAKASHAN

Publication Year 2018
ISBN-13

9789386863645

ISBN-10 9386863642
Binding

Hardcover

Number of Pages 160 Pages
Language (Hindi)
Subject

Poetry

‘वक़्त का मैं लिपिक’ अपने समय से सीधे मुठभेड़ तो है ही, इसमें कव‌ि की व्यक्तिगत पीड़ा भी अनुस्यूत है। उनके व्यक्तिगत जीवन में जो कुछ घटित हुआ है, उसी का प्रतिबिम्बन इसमें हुआ है और शायद ये गीत न होते तो वे बिखर गए होते, टूट गए होते, हिंस्र पशु हो गए होते, लेकिन इन गीतों ने उन्हें सहारा देकर मनुष्य बने रहने की ताक़त दी है।


यश स्वयं ही मानते हैं कि ये गीत, उनके लिए गीत नहीं उनके जीवन की तारीख़ें हैं। इनमें बाबरी मस्जिद का क़त्ल है तो गुजरात कांड के फफोले और छाले भी इनके बदन पर हैं। इन पर रोज़-रोज़ बलात्कार का शिकार होती सुबहों की पथरा गई चीख़ों का प्रतिरोध भी दर्ज़ है।


...एक रचनाकार अपने जीवन-संघर्ष में किन-किन मोड़ों से गुज़रता है, यह देखना हो तो यश मालवीय के इन गीतों से दो-चार हुआ जा सकता है।


वे अपने गीतों को नवगीत कहलवाना पसन्द करते हैं और मानते हैं कि ढेर सारी विडम्बनाओं के साथ तकनीक के कंट्रास्ट को साधने में नवगीतों की भूमिका ऐतिहासिक रही है। लेकिन उनका ज़ोर इस बात पर सदैव रहता है कि नवगीतों की बुनियादी शर्त उनका गीत होना है।


इस संकलन में शामिल उनके गीत इस शर्त को बख़ूबी पूरा करते हैं।

Yash Malviya

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