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Aadhi Raat Dugdugi

Author :

Suryanath Singh

Publisher:

VANI PRAKSHAN

Rs316 Rs395 20% OFF

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Publisher

VANI PRAKSHAN

Publication Year 2026
ISBN-13

9789373484693

ISBN-10 9373484699
Binding

Paperback

Number of Pages 296 Pages
Language (Hindi)
Weight (grms) 350
Subject

Comics, Mangas & Graphic Novels

हमारे समय की राजनीतिक व्यवस्था, तकनीक संजाल और पूँजीवादी तन्त्र ने मिल कर मानवीय मूल्यों, उच्च आदर्शों और स्थापित सिद्धान्तों को अपदस्थ कर दिया है। हर तरफ़, पल-पल, बनावटी विचारों का शोर बरस रहा है। पर, आदमी वास्तव में इन सबके बीच एक तरह से वैचारिक बहरेपन और विचार-शून्यता का शिकार होता जा रहा है। उसे अपनी चेतना तक की दस्तक ठीक से सुनाई नहीं दे पा रही। इस वातावरण में जिनके भीतर अब भी कुछ आदर्श बचे हैं, कुछ बेहतरी के सपने और योजनाएँ उमगती हैं, उन्हें अपने लिए जगह तलाश पाना मुश्किल है। इस उपन्यास का नायक प्रह्लाद भी इन्हीं स्थितियों का शिकार है। वह सेवामुक्त होने के बाद, युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और आत्मगौरव से भरने की एक योजना के साथ अपने गाँव आया है। पर, गाँव याकि पूरे देश के युवा जिस तरह के वैचारिक संजाल में फँसे और जिस तरह के उत्पादित आदर्शों में वे पगे नज़र आते हैं, उसमें प्रोफ़ेसर प्रह्लाद के लिए अपनी योजना को मूर्त रूप दे पाना असम्भव जान पड़ता है। गाँव भी अब लगभग अपने पुराने आदर्श खो चुका है, प्रोफ़ेसर प्रह्लाद के विचारों से उसका तालमेल नहीं बैठ पा रहा। इस उपन्यास की घटनाएँ संकेतकों के ज़रिये हमारे समय को खोलने का प्रयास करती हैं। इस उपन्यास में डुगडुगी मानवीय चेतना पर दस्तक की तरह सुनाई देती है। इसे धुकधुकी की तरह भी देखा जा सकता है। इस उपन्यास की घटनाएँ उसी डुगडुगी याकि धुकधुकी से नत्थी हैं। यह उपन्यास इस बात का भी पता देता है कि हमारे समय में किस तरह उच्च आदर्शों और उनको जीने वाले नायकों की नियति विफलता भोगने की ही हो गयी है।

Suryanath Singh

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