America Aur 45 Din by Sonroopa Vishal
Sonroopa Vishal
ख्यातिलब्ध कवि डॉ उमिलेश एवं श्रीमती मंजुल शंखधार की सुपुत्री सोनरूपा हिंदी में पीएचडी हैं। उन्होंने संगीत में भी उच्च शिक्षा प्राप्त की है। गद्य और पद्य में समान अधिकार रखने वाली सोनरूपा के पहले ग़ज़ल संग्रह 'लिखना ज़रूरी है' को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा 'हरिवंश राय बच्चन युवा गीतकार सम्मान' प्राप्त हो चुका है। 'चुप्पी को आवाज़ें दी हैं' उनका शीघ्र प्रकाश्य गीत संग्रह है। देश के सबसे प्रतिष्ठित मंच ‘लालकिला’ से लेकर अमेरिका के 24 शहरों में काव्यपाठ कर चुकीं सोनरूपा कवि सम्मेलन के मंचों पर एक उत्कृष्ट कवयित्री के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। निरंतर सामाजिक कार्यों में संलग्न सोनरूपा की रचनाओं का मूल स्वर प्रेम और सद्भाव है। इस पुस्तक में भी वह दो देशों की एकरूपता को अपने सकारात्मक नज़रिए देखती हुई नज़र आती हैं।
Sonroopa Vishal
HIND YUGM