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| Publisher | HIND YUGM |
| Publication Year | 2026 |
| ISBN-13 | 9788169516068 |
| ISBN-10 | 8169516064 |
| Binding | Paperback |
| Number of Pages | 122 Pages |
| Language | (Hindi) |
| Weight (grms) | 128 |
| Subject | Poetry |
यह कविताएँ महापुरुषों से भरी दुनिया में, नामर्द हो जाने की दास्ताँ हो सकती हैं। यह दलित, बहुजन और आदिवासी स्वरों को समझने की कोशिश हो सकती हैं। (लेकिन अपनी पोजीशनैलिटी के ज्ञान के साथ!) अमरता का भ्रम इन्हें बिल्कुल नहीं है, यह मिटने और मिटाने पर तुली हुई कविताएँ हो सकती हैं। यह कविताएँ और क्या-क्या हो सकती हैं—पढ़ने वाले तय करेंगे। यह तमाम ज़रूरी तत्वों की कमी से उपजी हुई कविताएँ हैं। यह शौक़ की तरह नहीं, विरोध की तरह लिखी गई हैं; और यह विरोध, आंदोलन की चाह रखता है। यह भी हो सकता है कि यह आपको कविता-संग्रह कम और ‘मेनिफ़ेस्टो’ ज़्यादा नज़र आए।
Ritu Resham
HIND YUGM