Buy Aayatein, 9789377373726 at Best Price Online - Buy Books India

Aayatein

Author :

Avinash Mishra

Publisher:

Rajkamal Prakashan

Rs250

Availability: Available

Shipping-Time: Usually Ships 3-5 Days

    

Rating and Reviews

0.0 / 5

5
0%
0

4
0%
0

3
0%
0

2
0%
0

1
0%
0
Publisher

Rajkamal Prakashan

Publication Year 2026
ISBN-13

9789377373726

ISBN-10 9377373727
Binding

Paperback

Number of Pages 120 Pages
Language (Hindi)
Weight (grms) 110
Subject

Poetry

प्रेम संयोग का परिणाम होता है। संयोग से आरम्भ हो एक संयोग पर पूरा भी हो जाता है। आगे के लिए नहीं बचता। अंत को दुर्योग भी कह सकते हैं पर प्रेमी ऐसा नहीं कहते, व्यापारी, षड्‌यंत्रकारी, हासिल करके गुल्लक में रख लेने वाले योद्धा ज़रूर कह सकते हैं।

ये कविताएँ संयोगों में चलती हैं। प्रेम की यात्रा में प्रेम को और स्वयं को देखते-जानते, डूबते-उतराते, बँधते-छूटते हुए।

इसी आरोह-अवरोह में भाषा भी अपने को उलट-पलट कर दुबारा देखती है, अपने शब्दों को नई तरतीब देते हुए, उस अर्थ को ग्रहण और व्यक्त करने को व्याकुल जिसे प्रेम देता है, प्रेमी पाते हैं

और अवाक् रह जाते हैं, शब्दरहित। सौन्दर्य का अंकन उससे भी कठिन, जितना कठिन उसका भोग; पौरुष और पराक्रम जहाँ असफल होते हैं, पर चाह की कील क़लम बन उसे कुछ तो आँकती है :  तिल को वह कह पाती है—

यह ‘सुंदर’ का अनुस्वार है।

अविनाश मिश्र की यह प्रेम-पुस्तिका जीवन और भाषा, दोनों जगह प्रेम को पुनर्न्यस्त करती है, लेकिन इन पंक्तियों में

उतरने के लिए पहली शर्त है—प्रेम में होना। अप्रेमियों के लिए यह नहीं है।

Avinash Mishra

5 जनवरी, 1986 को ग़ाज़ियाबाद में जन्म। शुरुआती शिक्षा और जीवन उत्तर प्रदेश के कानपुर में। आगे की पढ़ाई, लिखाई, संघर्ष और आजीविका के लिए साल 2004 से दिल्ली के आस-पास रहनवारी और बीच-बीच में दिल्ली से दूर प्रवास। कविता,आलोचना और पत्रकारिता के इलाक़े में सक्रिय। कुछ प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में सेवाएँ दीं और लगभग सभी प्रतिष्ठित प्रकाशन माध्यमों पर रचनाएँ और साहित्यिक पत्रकारिता से संबंधित काम प्रकाशित। ‘अज्ञातवास की कविताएँ’ शीर्षक से कविताओं की पहली किताब साहित्य अकादेमी से साल 2017 में और सृजनात्मक गद्य की पहली कृति ‘नए शेखर की जीवनी’ शीर्षक से साल 2018 में प्रकाशित। इन दिनों आलोचना की एक किताब पर काम और विश्व कविता और अन्य कलाओं की पत्रिका ‘सदानीरा’ का संपादन कर रहे हैं।
No Review Found
Similar Books
More from Author