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| Publisher | HIND YUGM |
| Publication Year | 2026 |
| ISBN-13 | 9788169516112 |
| ISBN-10 | 8169516110 |
| Binding | Paperback |
| Number of Pages | 140 Pages |
| Language | (Hindi) |
| Weight (grms) | 160 |
| Subject | Poetry |
मनुष्य के भीतर एक साथ कई संसार बसते हैं—आस्था का, प्रेम का, स्मृतियों का, रिश्तों का और उन प्रश्नों का, जिनके उत्तर अक्सर शब्दों से बाहर मिलते हैं। शालिनी सक्सैना का कविता-संग्रह ‘अप्रतिम’ इन्हीं भीतरी संसारों की सहज और आत्मीय यात्रा है।
संग्रह की कविताएँ गणेश और शिव की आराधना से आरंभ होकर प्रकृति, जीवन-दर्शन, आशा, माँ-बेटी के संबंध, पिता के संबल, श्रमिक के संघर्ष, प्रेम की कोमलता, बचपन की स्मृतियों और देश के वीरों के शौर्य तक विस्तृत होती हैं। कहीं चाँद कवयित्री का आत्मीय संवाद-सा<थी बनता है, कहीं नदी मनुष्य की प्रवृत्ति का रूपक, कहीं मौन शब्दों से अधिक मुखर हो उठता है। इन कविताओं में सुख-दुःख, मिलन-विरह, विश्वास-संशय और हक़ीक़त-ख़्वाब के बीच झूलता मन बार-बार अपने भीतर लौटता है।
सरल, संवादधर्मी भाषा और परिचित जीवन-बिंबों में रची ये कविताएँ पाठक से किसी औपचारिक दूरी के बिना मिलती हैं। ‘अप्रतिम’ उन अनुभूतियों को स्वर देता है जिन्हें हम प्रतिदिन जीते तो हैं, पर अक्सर व्यक्त नहीं कर पाते। कविताएँ हताशा के बीच आशा और व्यस्त जीवन में सुकून की संभावना रचती हैं। यह संग्रह पाठक को प्रेम, करुणा, कृतज्ञता और आत्मचिंतन के बीच ठहरकर अपने संबंधों, स्मृतियों और अंतर्मन को नए सिरे से देखने का आमंत्रण देता है।
Shalini Saxena
HIND YUGM