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Allahabadi Lantrani | इलाहाबादी लंतरानी

Author :

Dhananjai Chopra

Publisher:

LOKBHARTI PRAKASHAN

Rs297 Rs350 15% OFF

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Publisher

LOKBHARTI PRAKASHAN

Publication Year 2026
ISBN-13

9789377473099

ISBN-10 9377473098
Binding

Paperback

Number of Pages 223 Pages
Language (Hindi)
Weight (grms) 230
Subject

Indian Writing

क़िस्सों की ख़ासियत यह होती है कि मारकीन के थान की तरह वे खुलते चले जाते हैं। उनकी हक़ीक़त सुनाने वाला ही जानता है। एक गप्पबाज़ दूसरे गप्पबाज़ की सनद देता है और क़िस्सों में इज़ाफ़ा होता जाता है। धनंजय चोपड़ा के पास पुराने गली-मोहल्लों के क़िस्सों की भरमार है, यह पुस्तक पढ़कर बख़ूबी पता चलता है। धनंजय ने ये क़िस्से तरंग में लिखे हैं। धनंजय को न कभी लिखने की उतावली रही न छपने की। ख़ालिस इलाहाबादी हैं, ख़रामा-ख़रामा जीने वाले। जीता रहे इलाहाबाद। यहाँ आबाद रहें क़िस्से-कहानियाँ।

—ममता कालिया, वरिष्ठ कथाकार

पूरी दुनिया में सबसे अलग तरह के कॉस्मोपॉलिटन कल्चर वाले हमारे इलाहाबाद शहर का हर क़िस्सा ज़िन्दगी ज़िन्दाबाद करता हुआ मिलता है। ये क़िस्से हमें एक अलग ही ढंग का तेवर देते हैं, जिससे पूरी दुनिया में हमारी अलग और सबसे निराली पहचान बनती है। क़िस्सागो धनंजय चोपड़ा की इस पुस्तक में इलाहाबादी चबूतरेबाज़ी के जो क़िस्से शामिल हैं, उनकी बात ही कुछ और है। तय है कि इन क़िस्सों को पढ़ेंगे तो आपको हमारे शहर की अलमस्ती से प्यार हो जाएगा।

—तिग्मांशु धूलिया, फ़िल्म निर्देशक

Dhananjai Chopra

धनंजय चोपड़ा का जन्म इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश में हुआ। उन्होंने इलाहाबाद से ही पी-एच.डी. तक की शिक्षा प्राप्त की। वहीं 25 वर्ष तक पत्रकारिता और सम्पादन किया। 20 वर्ष से इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पत्रकारिता का अध्यापन कर रहे हैं। सत्रह पुस्तकें, सौ से अधिक शोधपत्र और पाँच हजार से अधिक आलेख प्रकाशित हैं। दूरदर्शन एवं आकाशवाणी के लिए वृत्तचित्र, हास्य नाटिका लेखन एवं कमेंटेटर के रूप में उनका योगदान रहा है। पत्रकारों को दी जाने वाली प्रतिष्ठित 'के. के. बिड़ला फेलोशिप' (2002) तथा भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की 'सीनियर फेलोशिप' (2008) के अन्तर्गत उन्होंने शोध कार्य किया। उन्हें भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा 'राजभाषा गौरव पुरस्कार' (2024) और सूचना प्रसारण मंत्रालय द्वारा 'भारतेन्दु हरिश्चन्द्र पुरस्कार' (2008), उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ द्वारा 'बाबूराव विष्णु पराड़कर पुरस्कार' (2013), 'धर्मवीर भारती पुरस्कार' (2015), राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग, नई दिल्ली द्वारा 'महात्मा गांधी हिन्दी लेखन पुरस्कार' (2018), पत्रकारिता के लिए 'लक्ष्मीकान्त वर्मा पुरस्कार', हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग द्वारा 'सम्मेलन सम्मान', इलाहाबाद नाट्य संघ द्वारा 'नाट्यश्री' तथा विज्ञान परिषद, प्रयाग द्वारा 'शताब्दी सम्मान' से सम्मानित किया गया है। सम्पर्क: c. dhananjai@gmail.com
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