| Publisher |
HIND YUGM |
| Publication Year |
2025 |
| ISBN-13 |
9788119555437 |
| ISBN-10 |
8119555430 |
| Binding |
Paperback |
| Edition |
1st |
| Number of Pages |
208 Pages |
| Language |
(Hindi) |
| Subject |
Travel Writing |
‘चीनी मिट्टी’ एक सफ़र है, एक बंद देश में, जिसमें बहुत कम ही लोग जाने की हिम्मत करते हैं। लेखक के साथ आप निकलिए बुलेट ट्रेनों से जुझावो, शंघाई और बीजिंग के सफ़र पर। इस दौरान देखिए टेक्नोलॉजी के शिखर पर आसीन देश को, उसके लोगों को और सबसे विचित्र उनके भोजन को। कुछ इतिहास, कुछ भूगोल के माध्यम से समझिए अपने पड़ोसी को जिसके साथ सबसे ज़्यादा सीमा रेखा साझा है। इस यात्रा में आपका सूत्रधार है, एक व्यक्ति जिसके चश्मे में लेंस है—एक रचनाकार के साथ-साथ एक इंजीनियर का भी।
Ranvijay
गद्य के विस्तीर्ण परंतु शिला समान धरातल पर, वर्तमान में कुछ जो नए पौधे वृक्ष बनने को आतुर हैं, उनमें से एक हैं –रणविजय। अब तक छपे अपने दो कहानी-संग्रहों ‘दर्द मांजता है…’ और ‘दिल है छोटा-सा’ से उन्होंने अपने पाठकों के मन में रणविजय के लेखन को और अन्वेषित करने की चाह जगाई है। एक लेखक के रूप में रणविजय अपनी कला और कथ्य के लिए सजग हैं। वे अपनी रचनाओं में लगातार विषय एवं संवेदनाएँ परिवर्तित करते जा रहे हैं, जो उनके लेखन के ही फलक मात्र को विस्तार नहीं देते वरन पाठकों को भी कुछ नया प्राप्त होता है। प्रस्तुत कृति उनका पहला उपन्यास है। यह उपन्यास ज़्यादातर वास्तविक घटनाओं को कल्पनाओं से जोड़कर बुना गया है, जो बहुत कुछ सोचने को मजबूर करता है। यह पाठक को अपने आसपास हो रहे अलक्ष्य परिवर्तनों के प्रति न केवल सशंकित करता है, अपितु उन्हें सचेत दृष्टि रखने के लिए जागरूक भी करता है। इसमें वर्णित दाँव-पेंच, पर्दे के पीछे होने वाली घटनाएँ हैं। अपनी ख़ुफ़िया संस्थाओं एवं उनके ऑपरेशनों पर आधुनिक राष्ट्र बहुत सारा धन क्यों ख़र्च करते हैं तथा क्यों होना चाहिए जैसे विषयों पर समझ बनाने में यह किताब मदद करती है।.
Ranvijay
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