Innerline Pass

Author :

Umesh Pant

Publisher:

HIND YUGM

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Publisher

HIND YUGM

Publication Year 2016
ISBN-13

9789384419561

ISBN-10 9384419567
Binding

Paperback

Edition 3rd
Number of Pages 160 Pages
Language (Hindi)
Subject

Travel Writing

एक दुनिया जो हमारे इर्द-गिर्द होती है, जहाँ हम रहते हैं, हमारे कम्फ़र्ट ज़ोन की दुनिया और एक दुनिया उससे कहीं दूर- हमारे सपनों की दुनिया। लेकिन उस दूसरी दुनिया तक पहुँचना इतना आसान नहीं होता।वहाँ पहुँचने के लिए कुछ सीमाएँ लाँघनी पड़ती हैं,पार करने होते हैं मुश्किलों के कुछ दरकते हुए पहाड़।और कभी-कभी जान तक मुश्किल में डालनी पड़ती है। शायद इसलिए हममें से ज़्यादातर लोग वहाँ जाने से बचते हैं। सुविधाओं की सीमारेखा के पार मन के उन प्रतिबंधित इलाक़ों में पहुँचने के लिए हम सभी कोपार करनी होती एक लाइन, इनर लाइन और खोजना होता है अपना-अपना इनर लाइन पास। उमेश पंत का यात्रा-वृतांत 'इनरलाइन पास' एक ऐसी ही यात्रा की कहानी है जो बाहर की दुनिया के साथ-साथ मन के भीतर भी चलती है। 18 दिनों में पूरी हुई इस क़रीब 200 किलोमीटर की पैदल यात्रा के रोमांचक अनुभवों का एक गुलदस्ता है ‘इनरलाइन पास’ जो आपको ख़ूबसूरती और जोख़िमों के एकदम चरम तक लेकर जाता है।

Umesh Pant

उमेश पंत मूलत: उत्तराखंड में पिथौरागढ़ जि़ले के गंगोलीहाट नाम के छोटे-से कस्बे में पले-बढ़े हैं। फ़िलवक्त दिल्ली में रहते हैं। इन्होंने दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के एमसीआरसी से मास कम्यूनिकेशन में मास्टर्स किया है। यात्रा-वृत्तान्त ‘इनरलाइन पास’ के लेखक हैं। करियर की शुरुआत मुम्बई जाकर बालाजी टेलीफ़िल्म्स में बतौर एसोशिएट राइटर की। फिर मुम्बई में गीतकार और पटकथा लेखक नीलेश मिसरा से जुडक़र उनके मशहूर किस्सागोई के कार्यक्रम के लिए कहानियाँ लिखीं। ग्रामीण अखबार ‘गाँव कनेक्शन’ में पत्रकार भी रहे हैं। गूगल के लिए बतौर ऑनसाइट हिन्दी लिंग्विस्ट काम कर चुके हैं। रेडियो के लिए फ़िल्म और गाने भी लिख चुके हैं। हिन्दी के तमाम अखबारों में यात्राओं और समसामयिक विषयों से जुड़े लेख लिखते रहे हैं। ‘यात्राकार’ नाम से ब्लॉग भी चलाते हैं। शौकिया घुमक्कड़ हैं और यात्राओं को तस्वीरों में सहेजने की रुचि रखते हैं।.
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