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Deodaar

Author :

Vineeta Asthana

Publisher:

Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.

Rs320 Rs400 20% OFF

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Publisher

Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.

Publication Year 2026
ISBN-13

9788168342330

ISBN-10 816834233X
Binding

Paperback

Number of Pages 208 Pages
Language (Hindi)
Weight (grms) 200
Subject

Indian Writing

'देओदार' एक प्रेमकथा है। माया, भारतीय मूल की माँ और पारसी मूल के पिता की इकलौती संतान है। वह 7 अक्तूबर, 2023 अपने माता-पिता को इजराइल में हुए आतंकवादी हमले में खो देती है। पश्चिम देशों में हमास आतंकवादियों के समर्थन से टूटी माया, शांति की तलाश में लंदन छोड़कर भारत के उत्तराखंड में स्थित अपने नाना, ब्रिगेडियर राम के रिटायरमेंट कॉटेज 'देओदार' में शरण लेती है। 'देओदार' में माया के शोक और वैचारिक मोहभंग से आत्म-पुनर्निर्माण की यात्रा शुरू होती है। हेरीटेज कॉटेज 'देओदार' को होमस्टे बनाकर माया जीवन की नई शुरुआत करती है। दूर-दूर से आने वाले यात्री अपने साथ अपनी कहानियाँ और अधूरे प्रश्न लेकर आते हैं। उनकी यात्राएँ माया के लिए भी अपने अधूरे प्रश्नों के उत्तर ढूँढ़ने की प्रक्रिया बनती है।

कहानी में एक रोचक मोड़ तब आता है, जब एक गुमनाम शरणार्थी बावर्ची के रूप में माया के जीवन में प्रवेश करता है। दो अकेले लोग, दो अलग यात्राएँ और एक ऐसा घर, जिसने दोनों को बिना किसी शर्त के स्वीकार किया है।

'देओदार' प्रेम, पीड़ा और पहचान के अर्थ खोजते दो मनुष्यों की कहानी है, जो हमें विश्वास दिलाती है कि जीवन में अच्छे लोग बार-बार मिलेंगे। कभी जो दिल टूट भी जाए तो भी प्रेम से और प्रेम की संभावना से मत रूठना। प्यार को हमेशा मौका देना। एक दिन जीवन में कोई ऐसा भी आएगा, जो तुम्हें वैसे ही प्यार करेगा, जैसे तुम करते हो।

Vineeta Asthana

पत्रकारिता में परास्नातक विनीता ने करियर की शुरुआत जनसत्ता से की और दैनिक जागरण ग्रुप, नेटवर्क 18 ग्रुप के साथ भी काम किया है। टीवी उन्हें रास नहीं आया तो 2006 में विनीता ने सक्रिय पत्रकारिता को अलविदा कह दिया और पूरी तरह से अध्यापन के क्षेत्र में आ गईं। पिछले 17 सालों में वो कई नामी-गिरामी मीडिया संस्थानों में अध्यापन कर चुकी हैं। विनीता, कंसलटेंट के तौर पर नए संस्थानों की स्थापना और प्रासंगिक पाठ्यक्रम बनाने का कार्य भी करती हैं। शिक्षा के क्षेत्र में भारत को विश्व मानचित्र पर पहुँचाने के अपने सपने के ख़ातिर, अक्टूबर 2019 में उन्होंने आईआईएमसी छोड़ने के साथ ही अध्यापन पर भी अल्पविराम लगा दिया। फ़िलहाल वो शिक्षा मंत्रालय की प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय छात्रवृत्ति योजना पर, आईआईटी में काम कर रही हैं। ख़ुद को न्यूज़ राइटर मानने वाली विनीता पठन और पाठन को लेकर बेहद संजीदा हैं। उनका काम उन्हें रोज़ नए किरदार और जीवित कहानियों से मिलने का अवसर देता है। ‘बेहया!’ उन्हीं जीवित कहानियों और किरदारों का एक अंश है।.
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