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Srishti Ka Swad

Author :

Vishwanath Prasad Tiwari

Publisher:

VANI PRAKSHAN

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Publisher

VANI PRAKSHAN

Publication Year 2026
ISBN-13

9789369443406

ISBN-10 9369443401
Binding

Hardcover

Number of Pages 160 Pages
Language (Hindi)
Weight (grms) 350
Subject

Indian Writing

सब कुछ बताना सम्भव नहीं है जो घटा है हमारे साथ क्योंकि वह शब्दावली अब लुप्त हो चुकी है। उस युग के बारे में जब हम कुछ बताना शुरू करते हैं तो हमारे बच्चे उसे समझने और उसकी सचाई परखने के लिए अपना गूगल देखना शुरू कर देते हैं। हम मोबाइल युग के ही नहीं, रेडियो युग के पहले के मानव हैं। आज हमारे बच्चे कल्पना भी नहीं कर सकते कि इस धरती पर मोबाइल के बिना लोग रहा करते थे। मोबाइल की अनभिज्ञता ने हमारी पीढ़ी को ऐसा असहाय बना दिया है कि हम अपने पूर्व आवास से बहिष्कृत और वंचित महसूस कर रहे हैं। मानसिक और बौद्धिक स्तर पर, रागात्मक भाव जो हमारे समय में अत्यन्त प्रबल हुआ करते थे, आज स्वयं को उपेक्षित और प्राय: अपमानित अनुभव कर रहे हैं। आज सभी अपने-अपने अजनबी हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस आभासी समय में फ़र्क़ नहीं रह गया है विभ्रम और यथार्थ में। —पुस्तक से

Vishwanath Prasad Tiwari

डॉ. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी का जन्‍म 20 जून, 1940 को भेड़िहारी, देवरिया, उत्‍तर प्रदेश में हुआ। वे गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के अध्यक्ष-पद से वर्ष 2001 में सेवानिवृत्त हुए।वे गोरखपुर से प्रकाशित होनेवाली साहित्यिक त्रैमासिक पत्रिका ‘दस्तावेज़’ के सम्पादक हैं। यह पत्रिका रचना और आलोचना की विशिष्ट पत्रिका है जो 1978 से नियमित रूप से प्रकाशित हो रही है। डॉ. तिवारी ‘साहित्य अकादेमी’ के 2013 से 2017 तक की अवधि के लिए अध्यक्ष रहे। उन्होंने गाँव की धूल-भरी पगडंडी से इंग्लैंड, मारीशस, रूस, नेपाल, अमरीका, नीदरलैंड, जर्मनी, फ़्रांस, लक्जमबर्ग, बेल्जियम, चीन और थाईलैंड की ज़मीन नापी है।उनका रचनाकर्म देश और भाषा की सीमा तोड़ता है। उड़िया में कविताओं के दो संकलन प्रकाशित हुए। हजारी प्रसाद द्विवेदी पर लिखी आलोचना पुस्तक का गुजराती और मराठी भाषा में अनुवाद हुआ। इसके अलावा रूसी, नेपाली, अंग्रेज़ी, मलयालम, पंजाबी, मराठी, बांग्ला, गुजराती, तेलगू, कन्नड़ व उर्दू में भी उनकी रचनाओं का अनुवाद हुआ है। उनके शोध व आलोचना, कविता-संग्रह, यात्रा-संस्मरण, लेखकों से जुड़े संस्‍मरण, साक्षात्कार आदि की दो दर्जन से ज्‍़यादा पुस्‍तकें प्रकाशित हैं। उन्होंने हिन्दी के कवियों, आलोचकों पर केन्द्रित कई पुस्तकों का सम्पादन किया है। वे ‘व्यास सम्मान’, ‘सरस्‍वती सम्‍मान’, ‘मूर्तिदेवी पुरस्‍कार’, ‘साहित्य भूषण सम्मान’, ‘पुश्किन सम्मान’ सहित कई सम्‍मानों से नवाजे जा चुके हैं।
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