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Jail Aur Swatantrata

Author :

Raghuvansh

Publisher:

VANI PRAKSHAN

Rs396 Rs495 20% OFF

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Publisher

VANI PRAKSHAN

Publication Year 2026
ISBN-13

9789373487991

ISBN-10 937348799X
Binding

Paperback

Number of Pages 237 Pages
Language (Hindi)
Weight (grms) 300
Subject

Indian Writing

जेल और स्वतन्त्रता की पृष्ठभूमि जेल की सन्नाटेदार दीवारें हैं—जहाँ समय थम-सा जाता है, और मन आत्ममन्थन तथा देश के इतिहास में निरन्तर गहराई तक उतरता चला जाता है। यह उन क्षणों का दस्तावेज़ है जब लेखक केवल घटनाओं का नहीं, बल्कि अपने भीतर उठते संघर्षों का सामना कर रहे थे—जो वैचारिक भी हैं और आध्यात्मिक भी। विभाजन की त्रासदी, गांधी की उपेक्षा, सत्ता का केन्द्रीकरण, नौकरशाही का विस्तार, दलगत राजनीति के समीकरण और अन्ततः आपातकाल—इन सबको लेखक केवल देखते ही नहीं, बल्कि भीतर तक महसूस करते हैं। इन अनुभवों के बीच वे बार-बार इस प्रश्न से जूझते हैं कि भारत वास्तव में किस दिशा में जा रहा था। यही अनुभूति उनकी भाषा को तीखा भी बनाती है और अत्यन्त मानवीय भी। इन पत्रों में लेखक अपने समय के बौद्धिकों, मित्रों और नेताओं से संवाद करते हैं—कभी विनम्रता से, कभी तीखेपन से, लेकिन हमेशा एक गहरी चिन्ता, ईमानदार उम्मीद और इस ज़िम्मेदारी के साथ कि इतिहास की निर्णायक घड़ियों में मौन नहीं रहा जा सकता। यह पुस्तक सत्ता या विरोध की कथा नहीं—एक ऐसे चिन्तक की नैतिक यात्रा है जो नागरिक चेतना को लोकतन्त्र का वास्तविक आधार मानता है। इसी कारण जेल और स्वतन्त्रता, केवल राजनीतिक कृति नहीं, एक आत्मिक और बौद्धिक दस्तावेज़ बन जाती है—और यही विवेक इसे समयातीत बनाता है।

Raghuvansh

सुप्रसिद्ध सामाजिक-राजनीतिक चिन्तक प्रो. रघुवंश का जन्म 30 जून, 1921 को उत्तर प्रदेश के जिला हरदोई के गोपामऊ क़स्बे में श्रीराम सहाय के परिवार में हुआ। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हिन्दी भाषा में एम.ए., डी.फ़िल. की उपाधि प्राप्त करने के बाद इसी विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में ही प्रवक्ता, रीडर, प्रोफ़ेसर (अध्यक्ष) रहकर हिन्दी भाषा, साहित्य के अध्ययन-अध्यापन में संलग्न रहे। सन् 1981 में सेवानिवृत्ति के उपरान्त विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की शोध-परियोजना के अन्तर्गत शिमला के उच्च अध्ययन संस्थान में ‘मानव संस्कृति का रचनात्मक आयाम’ विषय पर शोध-कार्य किया। प्रमुख कृतियाँ : ‘छायातप’ (कहानी); ‘तन्तुजाल’, ‘अर्थहीन’, ‘वह अलग व्यक्ति’, ‘यह जो अनिवार्य’ (उपन्यास); ‘हरी घाटी’ (यात्रा वृत्तान्त); ‘मानव पुत्र ईसा’ (जीवनी); ‘प्रकृति और काव्य’, ‘साहित्य का नया परिप्रेक्ष्य’, ‘समसामयिकता और आधुनिक हिन्दी कविता’, ‘नाट्य-कला’, ‘कबीर : एक नई दृष्टि’, ‘जायसी : एक नई दृष्टि’, ‘आधुनिक कवि निराला’, ‘हिन्दी साहित्य की समस्याएँ’ (आलोचना); ‘जेल और स्वतंत्रता’, ‘सर्जनशीलता का आधुनिक सन्दर्भ’, ‘आधुनिक परिस्थिति और हम लोग’, ‘मानवीय संस्कृति का रचनात्मक आयाम’, ‘पश्चिमी भौतिक संस्कृति का उत्थान और पतन’ (चिन्तन)! सम्पादन : ‘हिन्दी साहित्य कोश’ के दो भागों का सम्पादन, शोध-पत्रिकाओं ‘आलोचना’, ‘आलोचना समीक्षा’, ‘क ख ग’ तथा ‘अनुशीलन’ का सम्पादन। सम्मान : वर्ष 2008 का मूर्तिदेवी पुरस्कार, उत्तर प्रदेश हिन्दी-संस्थान का ‘भारत भूषण पुरस्कार’, के.के. बिड़ला फ़ाउंडेशन का ‘शंकर पुरस्कार’, बिहार सरकार का ‘जननायक कर्पूरी ठाकुर पुरस्कार’ तथा उ.प्र. सरकार का ‘साहित्य-भूषण सम्मान’। निधन : सन् 2013
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