नदिया गहरी नाव पुरानी
अब तक लगभग सभी विधाओं में अनुवाद के अनेक कार्य किये हैं किन्तु जो आनन्द वेगड़ जी की इस पुस्तक को अनूदित करने में आया और जितना सीखने को मिला, वह आज तक कभी नहीं मिला। ख़ुशनसीब हूँ मैं कि श्रद्धेय वेगड़ जी तथा बा (कान्ता बेन) से जबलपुर में मुलाक़ात हुई और उन्होंने स्वयं अपने हस्ताक्षर कर यह पुस्तक मुझे हिन्दी अनुवाद के लिए सप्रेम भेंट की। यह अनुवाद मेरे लिए मात्र एक लेखन कार्य नहीं अपितु वेगड़ जी के लिए, माँ नर्मदा के लिए अर्पित पुष्पांजलि है।
—मीनाक्षी जोशी
Amritlal Vegarh
जन्म : 3 अक्टूबर, 1928, जबलपुर में। 1948 से 1953 शान्तिनिकेतन में कला का अध्ययन। 1953 से 1988 स्थानीय आर्ट कॉलेज में चित्रकला के अध्यापक। चित्रकला के लिए मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग द्वारा शिखर सम्मान। नर्मदा पदयात्रा वृत्तान्त की तीन पुस्तकें हिन्दी और गुजराती दोनों में लिखीं। दोनों ही भाषाओं में अनेक पुरस्कारों से सम्मानित। मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग द्वारा राष्ट्रीय शरद जोशी सम्मान, केन्द्र सरकार द्वारा महापण्डित राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार, गुजराती पुस्तक ‘सौन्दर्यनी नदी नर्मदा’ साहित्य अकादमी, दिल्ली का अकादमी पुरस्कार। विद्यानिवास मिश्र स्मृति सम्मान, गुजरात साहित्य अकादेमी का गौरव पुरस्कार। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल द्वारा डी.लिट्. की मानद उपाधि (2018)।
प्रकाशित कृतियाँ : अमृतस्य नर्मदा, तीरे-तीरे नर्मदा (हिन्दी); परिक्रमा नर्मदा मैथानी, सौन्दर्यनी नदी नर्मदा, तीरे-तीरे नर्मदा, स्मृति आनु शान्तिनिकेतन, नदिया गहरी नाव पुरानी, सरोवर छली पड़या! (गुजराती); सौन्दर्यवती नर्मदा, अमृतस्य नर्मदा, स्मृतितील शान्तिनिकेतन, तीरे-तीरे नर्मदा (मराठी); सौन्दर्येर नदी नर्मदा, अमृतस्य नर्मदा, तीरे-तीरे नर्मदा (बांग्ला); Narmada River of Beauty, Narmada River of Joy (अंग्रेज़ी)।
Meenaksi Joshi (Translator)
Amritlal Vegarh
,Meenaksi Joshi (Translator)
VANI PRAKSHAN