| Publisher |
VANI PRAKSHAN |
| Publication Year |
2026 |
| ISBN-13 |
9789373486901 |
| ISBN-10 |
937348690X |
| Binding |
Paperback |
| Number of Pages |
310 Pages |
| Language |
(Hindi) |
| Weight (grms) |
300 |
| Subject |
Indian Writing |
इमरोज़नामा पर विद्वानों की प्रतिक्रियाएँ
Excellent book, Excellent Production.
-Dr. Sawrajbeer
The hard labour of a year Amia Kunwar catalogued with warmth and dedication every word written on Imroz by Pritam, and many other the Punjabi writers on the giving and loving soul he was and we have in hand a rare gift of words celebrating the 'kissa' of Amrita Pritam-Imroz.
-Nirupama Dutt
मैंने इतनी बढ़िया सम्पादित पुस्तकें बहुत कम देखी हैं। ज्यों-ज्यों इसे पढ़ता गया, मुतासिर होता गया। भावनाओं में बहता गया, आनन्द में डूबता गया।
- जसवन्त सिंह ज़फ़्फ़र
इमरोज़नामा की जो आत्मा है वह अमिया कुँवर है, उन्होंने इमरोज़ के बारे में शब्द-शब्द इकट्ठे किये, इमरोज़ की कविताएँ, उन पर लिखे लेखकों, कलाकारों के विचार पर अमिया कुँवर ख़ुद इस किताब में से गायब हैं जो कि बहुत बड़ी उपलब्धि है। शब्द लिख देने आसान हैं, पर शब्दों में रूह डालनी किसी-किसी लेखक के हिस्से में आती है। इस किताब में अमिया ने रूह फूंक दी है, जान डाल दी है।
- जंग बहादुर गोयल
इमरोज़ पर इतना बड़ा काम अकेले और इतने कम समय में करना, यह अमिया के बूते में ही सम्भव है। विद्यार्थियों, शोधार्थियों और साहित्य प्रेमियों को यह पुस्तक हर तरह से इमरोज के बारे में मुकम्मल जानकारी देती है।
- डॉ. पाल कौर
अमिया की प्रतिबद्धता, सुहृदयता मुग्ध कर गयी। सोच रहा हूँ, यह अमिया कुँवर कौन है, कोई यूनिवर्सिटी, फिर मन ने करवट बदली, नहीं, नहीं यह काम ह्वेनसांग ही कर सकता था। सच की खोज में निकला ह्वेनसांग। अमिया इमरोज की क्या लगती है? वह तो उसका साया हो गयी है। कोई इतना तादात्मक कैसे हो सकता है। जहाँ भी इमरोज का बीज मिला, उसे इमरोजनामा की धरती में बो दिया और खुद पवन हो गयी। ऋतु हो गयी।
- मक्खन मान
इमरोज़नामा एक प्रामाणिक दस्तावेज है, इमरोज के व्यक्तित्व, जीवन और उसकी कला को जानने-समझने के लिए।
- डॉ. मनमोहन सिंह
इमरोज़नामा के साथ-साथ मैं और अमिया भी सफ़र करते रहे। इमरोज़ को लेकर फैली भ्रान्तियाँ, अफवाहें, मनोकथनियाँ हमारे विचार-विमर्श का आधार रहीं। अमिया ने जिस बेबाकी, सादगी और साफ़गोई से इमरोज्ज का व्यक्तित्व पाठकों के लिए प्रस्तुत किया है, वह क़ाबिले-तारीफ़ है।
- डॉ. कंवलजीत कौर ढिल्लों
Amia Kunwar (Translator)
अमिया कुँवर (मौलिक नाम : डॉ. अमर जीत कौर) पंजाबी की सुप्रसिद्ध कवयित्री, अनुवादक एवं आलोचक ।
शिक्षा : एम.ए., एम.एड., पीएच.डी.।
प्रकाशित पुस्तकें : हिन्दी कविता-संग्रह: समय गवाही देगा, लमहों की गाथा, मरजीवड़ी (चुनिन्दा कविताएँ, अनुवादक, सम्पादक सुभाष नीरव)।
पंजाबी काव्य-संग्रह : छिर्णा दी गाथा, कवियो वाच, धम्मी वेला, ढाई अक्खर, वही दे वरके।
अमृता प्रीतम पर एक विशेष पुस्तक : अमृता : एक कायनात और उन पर सम्पादित तीन पुस्तकें। आलोचना की तीन पुस्तकें। अनेक पुस्तकों का सम्पादन। इमरोजनामा (पंजाबी में) के सम्पादन के लिए वर्ष, 2025 की सर्वश्रेष्ठ सम्पादित पुस्तक के लिए भाषा विभाग, पंजाब से सम्मानित। 1989 से अमृता प्रीतम का लगभग सारा साहित्य पंजाबी से हिन्दी में अनुवादित। इसके अतिरिक्त लगभग 30 पुस्तकों का अनुवाद-नेशनल बुक ट्रस्ट, प्रथम बुक्स, साहित्य अकादमी तथा निजी तौर पर।
सम्मान : अखिल भारतीय कवयित्री सम्मेलन, खुरजा साहित्य कला संगम, पंजाबी अकादमी, दिल्ली, भारतीय अनुवाद परिषद् ।
सम्प्रति : सेवानिवृत्त एसोसिएट प्रोफ़ेसर (पंजाबी), श्रीगुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली।
सम्पर्क : O-53, लाजपत नगर-2, नयी दिल्ली-110024
मोबाइल : 9811579138, 8447075572
Amia Kunwar (Translator)
VANI PRAKSHAN