| Publisher |
Yuvaan Books |
| Publication Year |
2025 |
| ISBN-13 |
9788119745548 |
| ISBN-10 |
811974554X |
| Binding |
Paperback |
| Edition |
First |
| Number of Pages |
384 Pages |
| Language |
(Hindi) |
| Dimensions (Cms) |
20X14X1 |
| Weight (grms) |
150 |
गोदान' स्वंत्रतापूर्व भारतीय ग्रामीण जीवन का विश्वसनीय और सर्वश्रेष्ठ उपन्यास है। जमींदारी, साहूकारी और धार्मिक-सामाजिक दबाव कैसे छोटे और मझोले किसानों को कुचलकर नेस्तोनाबूद करते हैं, यह प्रेमचंद ने अपने इस उपन्यास में बड़ी सच्चाई से दर्ज किया है। इस उपन्यास में जहाँ कथित उच्च वर्ग के खोखले और निर्मम स्वरूप को उघाड़कर रख दिया गया है वहीं विधवा-विवाह और जाति समस्या पर भी विचारोत्तेजक बहसें हैं। उपन्यास के स्त्री पात्रों के विकासक्रम को देखें तो प्रेमचंद अपने युग के प्रमुख स्त्रीवादी कथाकार ठहरते हैं। कथानायक होरी अपने जटिल जीवन के बीच से, एक गाय पाल लेने का अधूरा स्वप्न लिये-लिये विदा हो जाता है। यह इस उपन्यास की प्रमुख कथा है। इससे जुड़ी हुई अनेक उपकथाएँ हैं, जो मूल कथा जितनी ही महत्त्वपूर्ण हैं, इसलिए 'गोदान' आज भी गंभीरता से पढ़े जाने की माँग करता है।
MUNSHI PREMCHAND
Yuvaan Books