भाषा का क्या अनूठा खेल है, प्रयोग की क्या मोहक ताजगी! —विश्वनाथ त्रिपाठी यशवंत का मास्टर-पीस है। कुछ अंश तो इस क़दर ईर्ष्या पैदा करनेवाले हैं कि काश ये हमने लिखे होत —ज्ञान चतुर्वेदी ये भीतर उतर जानेवाली अद्भुत काव्यकथाएँ हैं। क्या गजब है कि इनका कवि गहन पाखंड को भी विचार की तरह पेलता है।—सुधीश पचौरी मोती कितने गहरे जाकर मिलते हैं, यह जानना हो तो हर एक को यह किताब जरूर पढ़ना चाहिए। —प्रेम जनमेजयये हमारी जनरेशन की भाषा है। इसके हैशटैग से पिस्तौल चलती है। असली-नक़ली की लाइन क्लियर, तबीयत साफ़ हो जाती है।—ट्विटर से गुनाह इतने शायराना कभी न थे। इंस्टाग्राम से कवि की मनोहर कहानियाँ रिबूट होकर और भी कातिल हो गई हैं। —खटाक कमेंट बॉक्स से
Yashwant Vyas
"यशवंत व्यास
जन्म : 6 मार्च, 1964
नए प्रयोगों के लिए चर्चित व्यंग्यकार-पत्रकार।
जो सहमत हैं सुनें, चिंताघर, अपने गिरेबान में, अमिताभ का अ, कामरेड गोडसे, इन दिनों प्रेम उर्फ़ लौट आओ नीलकमल, यारी-दुश्मनी, ख़्वाब के दो दिन, अब तक छप्पन, कल की ताज़ा ख़बर, हिट उपदेश : द बुक ऑफ़ रेजर मैनेजमेंट आदि किताबें।
हाल में शायर-फ़िल्मकार गुलज़ार के साथ चर्चित किताब बोसकीयाना; यारी-दुश्मनी, तथास्तु, रसभंग और नमस्कार जैसे लोकप्रिय कॉलम। किताबों में दो उपन्यास शामिल, दोनों पुरस्कृत। विभिन्न मीडिया उपक्रमों में सम्पादक, सलाहकार और संस्थापक की भूमिकाएँ।
लेखन के लिए शरद जोशी राष्ट्रीय सम्मान। एक दशक से प्रतिष्ठित अख़बार अमर उजाला के समूह सलाहकार और नए माध्यमों पर कुछ अनूठे प्रयोगों में व्यस्त जिनमें से एक है—खटाक फ़िक्शन सीरीज़, जो डिजिटल और प्रिंट के साझे की दोस्ताना कारीगरी है।"
Yashwant Vyas
Radhakrishna Prakashan