Availability: Available
Shipping-Time: Usually Ships 1-3 Days
0.0 / 5
| Publisher | Radhakrishna Prakashan |
| Publication Year | 2016 |
| ISBN-13 | 9788183611558 |
| ISBN-10 | 8183611559 |
| Binding | Paperback |
| Number of Pages | 165 Pages |
| Language | (Hindi) |
| Dimensions (Cms) | 21 X 14 X 2.5 |
| Weight (grms) | 181 |
| Subject | Contemporary Fiction |
कथाकार और उपन्याकार के रूप में शिवानी की लेखनी ने स्तरीयता और लोकप्रियता की खाई को पाटते हुए एक नई जमीं बनाईं थी जहाँ हर वर्ग और हर रुचि के पाठक सहज भाव से विचरण कर सकते थे ! उन्होंने मानवीय संवेदनाओं और सम्बंधगत भावनाओं की इतने बारीक और महीन ढंग से पुनर्रचना की कि वे अपने समय में सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले लेखकों में एक होकर रहीं ! कहानी, उपन्यास के अलावा शिवानी ने संमरण और रेखाचित्र आदि विधाओं में भी बराबर लेखन किया ! अपने संपर्क में आए व्यक्तियों को उन्होंने करीब से देखा, कभी लेखक की निगाह से तो कभी मनुष्य की निगाह से, और इस तरह उनके भरे-पूरे चित्रों को शब्दों में उकेरा और कलाकृति बना दिया ! 'जालक' शिवानी के अंतर्दृष्टिपूर्ण संस्मरणों का संग्रह है जिसमें उन्होंने अपने परिचय के दायरे में आए विभिन्न लोगों और घटनाओं के बहाने से अपनी संवेदना और अनुभवों को स्वर दिया है ! आशा है, शिवानी के कथा-साहित्य के पाठकों को उनकी ये रचनाएँ भी पसंद आएँगी !
Shivani
Radhakrishna Prakashan