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| Publisher | Manjul Publishing House Pvt. Ltd. |
| Publication Year | 2025 |
| ISBN-13 | 9789355434654 |
| ISBN-10 | 9355434650 |
| Binding | Hardcover |
| Number of Pages | 90 Pages |
| Language | (Hindi) |
| Dimensions (Cms) | 21 x 14 x 1.2 |
| Subject | Poetry |
नर्मदा जानती है मन का हर ताप समझती है इसके भीतर उठती तरंगों को इसलिए जब खुद से मिलना हो तो नदी से मिलना चाहिए नर्मदा सिर्फ शिव का अभिषेक नहीं करती ये करती है अभिषेक मन का भी कि धुल जाएं हर संताप – हर पीड़ा बदरी सूरज की किरणों के साथ बहती है इसका वेग मानो दिखा रही हो आईना कि चलना सबका का नहीं शाश्वत कुछ भी नहीं बदला, गति में रहना यही सत्य है अमित
Aayushri Saxena
Manjul Publishing House Pvt. Ltd.