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| Publisher | Radhakrishna Prakashan |
| Publication Year | 2024 |
| ISBN-13 | 9788119989713 |
| ISBN-10 | 8119989716 |
| Binding | Paperback |
| Number of Pages | 152 Pages |
| Language | (Hindi) |
| Dimensions (Cms) | 22 X 14 X 1 |
| Subject | True Accounts |
भारतीय इतिहास में एक वक्त ऐसा भी था जब यहाँ के लोग एक तरफ ब्रिटिश पराधीनता की मार झेल रहे थे तो दूसरी तरफ वे अपनी ही भेदभावमूलक सामाजिक व्यवस्था के चक्के तले पिस रहे थे। मुट्ठी भर उच्च जातीय और उच्च वर्गीय लोग ही इस दोहरी मार से अप्रभावित थे लेकिन अधिसंख्य आबादी के लिए इससे बचना सम्भव नहीं था। इसमें भी, उन लोगों की मुश्किलों की तो कोई गिनती ही न थी, जो समाज के सबसे निचले पायदान पर थे। इन्हीं परिस्थितियों में परिवर्तन की वह सुगबुगाहट शुरू हुई जिसे आज 'पुनर्जागरण' कहा जाता है। जाहिर है, एक खंडित-विभाजित समाज में कोई पुनर्जागरण भी अखंड, सर्वस्वीकृत नहीं हो सकता था। उच्च जातीय-उच्च वर्गीय लोगों के लिए पुनर्जागरण का मतलब अगर अपना कथित धर्म और संस्कृति बचाने की जद्दोजहद थी तो उनसे इतर के लोगों के लिए समानता और शिक्षा की स्वतंत्रता हासिल करने का संघर्ष। यह दूसरी धारा जिन महान विभूतियों के जीवन और कर्म से मूर्तिमान हुई, ज्योतिराव फुले उन्हीं में से एक थे। यह उपन्यास उन्हीं ज्योतिराव के जीवन और संघर्ष की कथा पेश करता है। समाज की रूढ़िवादी, ब्राह्मणवादी शक्तियों ने पग-पग पर उनके सामने बाधा रखी ताकि ज्योतिराव अपने उद्देश्यों से पीछे हट जाएँ। लेकिन ज्योतिराव ने कभी हार नहीं मानी और कभी अपने व्यवहार में अनुदारता नहीं आने दी। वे और उनकी जीवनसंगिनी सावित्रीबाई फुले ने अपने जीवन और कर्म से समाज के सामने ऐसा आदर्श उपस्थित किया, जिसमें एक स्वतंत्र, सक्षम आधुनिक राष्ट्र का अस्तित्व और भावी पीढ़ियों के लिए पथ-निर्देश निहित था। एक अवश्य पठनीय और प्रेरक उपन्यास!
Mohandas Naimisharay
Radhakrishna Prakashan