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| Publisher | Manjul Publishing House Pvt. Ltd. |
| Publication Year | 2026 |
| ISBN-13 | 9789373176215 |
| ISBN-10 | 9373176218 |
| Binding | Paperback |
| Number of Pages | 252 Pages |
| Language | (Hindi) |
| Dimensions (Cms) | 21 x 14 x 2 |
| Subject | Novel |
पानीबाई केवल ग्रामीण जीवन की कथा नहीं, एक दिवालिया हो चुकी सामूहिक चेतना का चित्रपट है, जिसमें प्रकृति भी मौन आक्रोश से भर उठती है। मेघगढ़ के सूखे मरुस्थल में पानी सिर्फ़ जीवन का साधन नहीं, सत्ता और भय का हथियार बन चुका है। इसी हथियार के नीचे सरिता जैसी नारी कुचली जाती है; गर्भ, देह और अस्तित्व सहित। डॉ. सुधीर आज़ाद ने यह उपन्यास अनगिनत “पानीबाईयों” को समर्पित किया है जो हमारे गाँवों-कस्बों में आज भी शोषण झेल रही हैं, जिन्हें भूत-प्रेत, डायन, सुखानबाई, उजाड़ू जैसी संज्ञाओं से पुकारा जाता है। जो पानी की एक-एक बूँद को मोहताज हैं और जन्म भर दुःख भोगती हैं। पानीबाई को केवल एक ग्रामीण-पृष्ठभूमि का उपन्यास समझकर न पढ़ें। यह एक भीषण सामाजिक आलोचना है, जो समाज की सामूहिक संवेदनशून्यता, लोक-परंपरा के खोखले उत्सव, महिलाओं पर अत्याचार, जल-संकट तथा जल-सत्ता के दुरुपयोग, अंधविश्वास की गहराई, और अभिशप्त जीवन के ताने-बाने को भेदती है। यह जल त्रासदी का एक जीवंत दस्तावेज़ है, जो पाठक को झकझोरता है और कई असहज प्रश्न छोड़ जाता है।
Sudhir Azad
Manjul Publishing House Pvt. Ltd.