Sifar Ka Safar

Author :

Sanjaya Shepherd

Publisher:

HIND YUGM

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Publisher

HIND YUGM

Publication Year 2026
ISBN-13

9788119555727

ISBN-10 8119555724
Binding

Paperback

Number of Pages 288 Pages
Language (Hindi)
Weight (grms) 241

पुस्तक 'सिफ़र का सफ़र' एक 22 साल के युवा लड़के की यात्रा के समानांतर चलती हुई एक वैचारिक और आत्मिक यात्रा है। यह यात्रा दिल्ली जैसे गतिशील शहर से शुरू होकर पार्वती घाटी की शांत और रहस्यमयी वादियों तक पहुँचती है और यह बताती है कि हम सब यात्रा में हैं, हम सब एक तरह के भटकाव को जी रहे हैं, हम सब इस दुनिया के खोए हुए लोग हैं। इसीलिए यात्रा के साथ-साथ ख़ुद को पाने की एक वैचारिक तलाश भी परस्पर चलती रहती है।

इस तलाश के दौरान कई अहम सवालों से गुज़रते हुए मन इस बात पर आकर ठहर जाता है कि यह विचार आख़िरकार वातावरण में तैरते हुए बीज ही तो हैं? हम जब तक इन्हें रोपेंगे नहीं, यह पौधे या फिर पेड़ नहीं बनेंगे। इसीलिए हमारे जीवन में विचारों की प्रासंगिकता को सबसे सर्वोपरी माना गया है।

यह विचार हमारा व्यक्तित्व और जीवन ही तय नहीं करते बल्कि एक ऐसी दुनिया में लेकर जाते हैं जहाँ से मानवता से जुड़े तरह-तरह के प्रश्न पैदा होते हैं। इस संदर्भ में शिप ऑफ़ थीसियस का सिद्धांत बहुत ही प्रासंगिक माना गया है। यह पुस्तक भी कुछ ऐसे ही प्रश्न पैदा करती और उत्तर तलाशने के क्रम में आगे बढ़ती हुई थीसियस के उसी सिद्धांत तक पहुँचती है।

यूनान का महान नायक थीसियस एथेंस शहर का संस्थापक और भविष्य का राजा था। एक कथा के अनुसार, एथेंस को हर वर्ष क्रेट के राजा मिनोस को सात युवक और सात युवतियाँ बलि के रूप में भेजनी पड़ती थीं, जिन्हें भयानक मिनोटॉर राक्षस खा जाता था। तीसरे वर्ष जब यह बलि दी जानी थी, तो थीसियस स्वयं उस दल में शामिल हुआ ताकि वह मिनोटॉर से लड़ सके और अपने लोगों को इस भयावह प्रथा से मुक्त कर सके। वह अपने जहाज़ पर सवार होकर निकला, मिनोटॉर का वध किया और विजयी होकर एथेंस लौट आया।

यह जीत थीसियस की थी लेकिन वह जहाज़ दुनिया भर में बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक बन गया। कहा जाता है कि उसके जहाज़ को स्मारक के रूप में सुरक्षित रखा गया और हर वर्ष देवता अपोलो के सम्मान में डेल्फ़ी भेजा जाता था। यह जहाज़ सदियों तक एथेंस के बंदरगाह में रखा रहा और समय-समय पर उसकी जर्जर लकड़ियों को बदलकर नई लकड़ी लगाई जाती रही ताकि वह उपयोगी बना रहे। यूनानी इतिहासकार और दार्शनिक प्लूटार्क ने इस घटना का उल्लेख करते हुए लिखा है कि थीसियस और एथेंस के युवाओं का वह जहाज़, जिसमें तीस चप्पू थे, डेमेट्रियस ऑफ़ फ़ेलेरम के समय तक सुरक्षित रखा गया था। जब भी कोई लकड़ी सड़ जाती, उसे हटाकर नई लकड़ी लगा दी जाती थी। इस प्रकार यह जहाज़ दार्शनिकों के लिए एक तर्कसंगत प्रश्न बन गया कि क्या यह वही जहाज़ है, या अब यह नया जहाज़ बन चुका है?

इसी विचार को दुनिया भर में 'थीसियस का सिद्धांत' के रूप में जाना गया।

किताब 'सिफ़र का सफ़र' एक लड़के की यात्रा और रास्ते में मिले तीन सहयात्रियों के माध्यम से एक क़दम आगे बढ़कर इस बात को बताने की कोशिश करती है कि; यह प्रश्न सिर्फ वस्तुओं पर ही नहीं बल्कि हम इंसानों पर भी लागू होता है। आप कौन हैं? वह व्यक्ति जो आज हैं? जो दस साल पहले थे? या जो पंद्रह साल बाद होंगे? क्या आप अपने शरीर हैं, अपने विचार, अपने मूल्य या अपनी स्मृतियाँ? आपकी पहचान क्या है; आपकी नौकरी, आपका नाम, आपके रिश्ते या आपका अनुभव? और एक लंबे और गहरे भटकाव के बाद एक लड़की, एक संन्यासी और एक घुमक्कड़ के जीवन तक लेकर जाती है और पुस्तक का रूप ले लेती है।

हम पाते हैं कि जैसे-जैसे समय बदलता है, हमारे जीवन की लगभग हर चीज़ बदलती जाती है, फिर भी स्वयं का बोध बना रहता है।

कई मनोवैज्ञानिक इस बात से सहमत हैं कि थीसियस का जहाज़ एक वस्तु नहीं बल्कि एक संगठनात्मक संरचना है जो निरंतरता के अनुभव से पहचानी जाती है। थीसियस के लिए उसका जहाज़ सिर्फ लकड़ियाँ और पाल नहीं था बल्कि एक व्यवस्था थी। उसका आकार, उसकी दिशा, उसका उद्देश्य और उससे जुड़ी यादें ही उसे वही जहाज़ बनाती थीं। जब तक इस संपूर्ण संरचना में निरंतरता बनी रही, चाहे लकड़ियाँ बदल जाएँ, वह जहाज़ थीसियस का जहाज़ ही रहेगा।

शायद मनुष्य भी कुछ ऐसा ही है। बदलता हुआ, फिर भी निरंतर वही। इस पुस्तक को पढ़िए, यह पुस्तक आपको एक नए तरह के विचार, एक नई तरह की यात्रा और एक नए तरह के जीवन तक लेकर जाएगी। आप सैकड़ों क़िस्सों और कहानियों के मध्य से गुज़रते हुए उस दर्शन तक पहुँचेंगे जिनसे एक यात्री का जीवन बनता है।

दुनिया भर के घुमक्कड़ो, यह किताब तुम्हारी और पूरी तरह से तुम्हारे लिए है।

Sanjaya Shepherd

संजय शेफ़र्ड— लेखक और घुमक्कड़। देश-दुनिया में कभी मतलब तो कभी बेमतलब घूमते रहते हैं। कुछ साल पहले तक घूमना शौकिया शुरू हुआ था पर धीरे-धीरे यह इनका पैशन बन गया। जन्म गोरखपुर में हुआ। शुरुआती शिक्षा नवोदय विद्यालय से प्राप्त की। फिर मास कम्यूनिकेशन में बैचलर और मास्टर करने के बाद बालाजी टेलीफ़िल्म, रेडियो मिर्ची और बीबीसी ट्रेवल में काम किया। साल 2023 में प्रकाशित हुआ इनका उपन्यास ‘ज़िंदगी ज़ीरो माइल’ पाठकों के बीच ख़ूब सराहा गया। ‘विष्णु प्रभाकर साहित्य सम्मान 2024’ से सम्मानित। वर्तमान में घुमक्कड़ी और स्वतंत्र रूप से लेखन करते हैं।
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