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Tibet main saat varsh (Hindi)

Author :

Heinrich Harrer

Publisher:

Manjul Publishing House Pvt. Ltd.

Rs374 Rs499 25% OFF

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Publisher

Manjul Publishing House Pvt. Ltd.

Publication Year 2026
ISBN-13

9789373174433

ISBN-10 9373174436
Binding

Paperback

Number of Pages 376 Pages
Language (Hindi)
Weight (grms) 350
Subject

Fiction/non-fiction

यूरोप में जिन दिनों द्वितीय विश्व युद्ध चल रहा था, उसी दौरान हाइनरिक हैरर हिमालय की चढ़ाई कर रहे थे। वह एक जाने-माने पर्वतारोही और ओलंपिक स्की चैंपियन भी थे। वह ऑस्ट्रियाई नागरिक थे जिन्हें भारत में अंग्रेज़ों ने क़ैद कर लिया था। लगभग अति-मानवीय प्रयासों के बल पर वह नज़रबंदी शिविर से बच निकलने में सफल रहे और तिब्बत के निषिद्ध शहर ल्हासा में पहुंच गए। इस पवित्र स्थल के दर्शन करने वाले वह पहले पश्चिमी व्यक्ति थे। सात साल तक हैरर ने यहां की भाषा सीखी और तिब्बतियों के बारे में इतनी समझ हासिल कर ली जितनी किसी पश्चिमी व्यक्ति ने पहले कभी नहीं की थी। वह युवा दलाई लामा के दोस्त और शिक्षक बन गए और जब दलाई लामा, लाल चीनी आक्रमण से बचकर भारत आए तो हैरर भी उनके साथ आ गए। यात्रा-वृत्तांत लेखन विधा में यह पुस्तक एक मील का पत्थर है। यह एक रहस्यमय और शानदार संस्कृति की पृष्ठभूमि में अविश्वसनीय साहस और आत्म- निर्भरता की एक अद्भुत कहानी है।

Heinrich Harrer

हाइनरिक हैरर का जन्म 1912 में कैरिंथिया में हुआ था। उन्होंने ग्राज़ यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की और भूगोल और खेल-कूद दोनों में ही प्रतिष्ठा अर्जित की। उनके स्कीइंग कौशल ने उन्हें 1936 की ऑस्ट्रियाई ओलिंपिक टीम में जगह दिलाई और 1937 में उन्होंने वर्ल्ड यूनिवर्सिटी स्लैलम चैम्पियनशिप जीती। वह उस दल में शामिल थे जिसने 1938 में सबसे पहले आइगर के कुख्यात उत्तरी मुख की चढ़ाई की थी। उन्होंने पर्वतारोहण पर एक उत्कृष्ट पुस्तक द वाइट स्पाइडर लिखी । इसमें उस ख़तरनाक चढ़ाई के लिए किए गए प्रयासों का पूरा इतिहास दर्ज है। 2006 में 93 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया।
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