| Publisher |
Rajkamal Prakashan |
| Publication Year |
2024 |
| ISBN-13 |
9789360863197 |
| ISBN-10 |
936086319X |
| Binding |
Paperback |
| Number of Pages |
144 Pages |
| Language |
(Hindi) |
समय के बदलते मिजाज और जीवन तथा मन की शाश्वत जरूरतों को रेखांकित करती ‘वह आवाज’ कहानी-संग्रह की कहानियाँ अपनी दृष्टि के फैलाव के चलते भी हमें आकर्षित करती हैं और कहन के अपने तरीके से भी। गाँव-जवार की पुरखिन धरती से उखड़े, किसान से मजदूर बनकर शहरों के किनारे शरणार्थी जीवन जीते लोग हों, या जीवन के पल-पल बदलते रूपों के साथ सामंजस्य बिठाने को जूझता मध्यवर्ग हो, आशा प्रभात हर बार अपनी भाषा को ऐसा प्रवाह देती हैं कि पाठक हर कहानी के साथ दूर तक बहता चला जाता है। ‘वह आवाज’ उनका नया कहानी-संग्रह है। इसमें संकलित ग्यारह कहानियों में उन्होंने ग्रामीण एवं शहरी समाज के समकालीन संसार से कुछ ऐसे विषय पकड़े हैं जिन पर दृष्टिपात किया जाना अत्यन्त जरूरी है। प्राकृतिक आपदाओं के सम्मुख असहाय और सरकारी मशीनरी के सामने निरुपाय साधारण जनगण की विवशताएँ भी इसमें हैं, और पीढ़ियों के बीच खुलते भावनात्मक गवाक्षों से फूटती उम्मीदें भी। संकलन की शीर्षक कथा ‘वह आवाज’ एक ऐसी दुनिया की तरफ इशारा करती है जिसका होना आधुनिक मनुष्य के मन को अकसर चौंका जाता है।
Asha Prabhat
जन्म: 21 जुलाई, 1958 शिक्षा: स्नातक । हिंदी में प्रकाशित कृतियाँ: दरीचे (काव्य-संग्रह); धुंध में उगा पेड़, जाने कितने मोड़, मैं जनक नंदिनी (उपन्यास); कैसा सच (कथा-संग्रह) । उर्दू में प्रकाशित कृतियाँ: धुंध में उगा पेड़, जाने कितने मोड़ (उपन्यास)। मरमूज (शेरी मजमूआ); वह दिन (अफसानवी मजमूआ)। लिप्यंतरण एवं संपादन: साहिर समग्र (साहिर लुधियानवी का रचना-संसार) । सम्मान: बिहार राष्ट्र भाषा परिषद् द्वारा 'साहित्य सेवा सम्मान', बिहार उर्दू अकादमी द्वारा 'सुहैल अजीमावादी अवार्ड' और 'खसूसरी अवार्ड', 'प्रेमचंद सम्मान', 'दिनकर सम्मान', 'उर्दू दोस्त सम्मान' आदि । संप्रति: स्वतंत्र लेखन व पत्रकारिता
Asha Prabhat
Rajkamal Prakashan