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Bharat Vibhajan Ki Anth:Katha: Bharat Ke Vibhaajan Par Ek Pramanik Pustak

Author:

Priyanvad

Publisher:

Hind Pocket Books

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Publisher

Hind Pocket Books

Publication Year 2015-01
ISBN-13

ISBN 9788121620239

ISBN-10 8121620236
Binding

Paperback

Number of Pages 592 Pages
Language Hindi
विभाजन किसी भी देश की भूमि का ही नहीं होता, लो--ों की भावना"ं का भी होता है। विभाजन का दर्द वे लो-- ही सही तरह से जानते हैं, जिन्होंने प्रत्यक्ष रूप से इसे सहा है। बँटवारे के दौरान ...पना घर-बार छोड़ने, ...पनों को -ोने का दर्द आज भी उन्हें सालता है। आजादी के सुनहरे भविष्य के लालच में देश की जनता ने विभाजन का जहरीला घूँट पी तो लिया, पर इस सवाल का जवाब आज तक नहीं मिल पाया कि क्या भारत का बँटवारा इतना ही जरूरी था? आ-िर ऐसे क्या कारण थे, जिनकी वजह से देश दो टुकड़ों में बँट --या? ब्रिटेन की छलपूर्ण नीति? मुस्लिम ली-- की फूटनीति? भारतीय जनता में दृढ़ता "र सामर्थ्य का ...भाव? कां--्रेस की --ैर-जिम्मेदाराना भूमिका? या फिर --ांधीजी की ...हिंसा? कौन थे इसके लिए जिम्मेदार? हिंदू-मुसलमान एक-साथ क्यों नहीं रह सके? तब देश का शीर्षस्थ नेतृत्व क्या कर रहा था? क्या थी भूमिका उनकी? कहाँ थे इस विभाजन के बीज? प्र-्यात कथाकार प्रियंवद ने इस पुस्तक में ऐसे तमाम सवालों के जवाब -ोजने का श्रम किया है। कथाकार होने के नाते उनकी मोहक भाषा, रोचक शैली "र विवेचनात्मक दृष्टि ने इसे पठनीय ही नहीं, सं--्रहणीय भी बना दिया है। कहानीकार "र उपन्यासकार होने के साथ-साथ प्रियंवद '...कार' पत्रिका के संपादक भी हैं "र 'सं--मन' के संयोजक भी। उनकी कहानियों पर '...नवर' व '-र--ोश' नामक फिल्में भी बनी हैं।