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| Publisher | Pankti Prakashan |
| Publication Year | 2026 |
| ISBN-13 | 9788199334755 |
| ISBN-10 | 8199334754 |
| Binding | Paperback |
| Number of Pages | 144 Pages |
| Language | (Hindi) |
| Dimensions (Cms) | 19.7 x 12.7 x 1 |
| Weight (grms) | 100 |
| Subject | Poetry |
यह पुस्तक गद्य और कविता—दोनों विधाओं का सुंदर और संवेदनशील संगम है, जिसे युवा लेखक हिमांशु मोहन ने अत्यंत सहजता और परिपक्वता के साथ रचा है। एनआईटी से शिक्षित और वर्तमान में बेंगलुरु में कार्यरत हिमांशु मोहन की लेखनी उम्र से कहीं अधिक गहरी और अनुभवपूर्ण दिखाई देती है। पुस्तक में छोटे-छोटे अध्याय हैं, जो जीवन, सोच, रिश्तों, अकेलेपन, शहर, स्मृतियों और भीतर चलने वाले संवादों जैसे अनेक विषयों को छूते हैं। हर अध्याय संक्षिप्त होते हुए भी भावनात्मक रूप से समृद्ध है और पाठक को ठहरकर सोचने के लिए प्रेरित करता है। गद्य के साथ-साथ इसमें कुछ चुनिंदा कविताएँ भी शामिल हैं, जो पुस्तक के भाव संसार को और विस्तार देती हैं। यह देखना सचमुच सुखद है कि आज की युवा पीढ़ी इतनी सुंदर, संवेदनशील और सधी हुई भाषा में लिख रही है। गद्य और कविता पढ़ने वाले युवा हिन्दी पाठकों के लिए यह पुस्तक विशेष रूप से अनुशंसित है। यदि आप सरल लेकिन असरदार लेखन पसंद करते हैं, तो यह पुस्तक आपके लिए एक यादगार पाठ अनुभव बनेगी।
Himanshu Mohan
Pankti Prakashan