Dil Hai Chhota Sa

Author :

Ranvijay

Publisher:

HIND YUGM

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Publisher

HIND YUGM

Publication Year 2020
ISBN-13

9789387464759

ISBN-10 938746475X
Binding

Paperback

Edition 2nd
Number of Pages 160 Pages
Language (Hindi)
Subject

Short Stories

नितांत आरंभ में… आपको मिलेगी चित्रा। चुलबुली और चित्ताकर्षक। अपने छोटे-छोटे बालों को, माथे से झटकती हुई। ऐसे ही वो झटक लेगी शशांक का दिल। फिर कशमकश, दुनियादारी, संयोग-वियोग से होते हुए मोहब्बत सबकुछ लुटाकर भी अंत में ख़ाली हाथ रह जाती है। विनीता अपने घर की दहलीज़ पार कर जब वापस आती है तो दरवाजे उसी के लिए सदा के लिए बंद कर देती है, जिसके लिए दहलीज़ पार किया था। आगे यात्रा में, जहाँगीरगंज और बेलहिया नामक दो गाँव मिलेंगे, अपने भोले-भाले, कपटी चरित्रों के साथ, संपूर्ण नग्नता में आपके सामने खड़े होंगे, जिनसे आपको संवेदना भी होगी और उन पर क्रोध भी आएगा। कुसली-बदलू, श्यामा और रामजीत अपनी निर्धनता की कोठरी में, झरोखे से आती सूरज की रोशनी देख रहे हैं, परंतु सूरज के पीछे काले बादल भी आ रहे हैं। यात्रा के अंत मे मिलेगी- अमनदीप कौर। लखनऊ के इंजीनयरिंग कॉलेज की फ़र्स्ट ईयर स्टूडेंट, सुंदरता की प्रतिमान, इतनी कि बैचमेट और प्रोफ़ेसर दोनों इश्क़ में पड़ गए। और फिर इस संघर्ष का क्या निकलेगा परिणाम?.

Ranvijay

गद्य के विस्तीर्ण परंतु शिला समान धरातल पर, वर्तमान में कुछ जो नए पौधे वृक्ष बनने को आतुर हैं, उनमें से एक हैं –रणविजय। अब तक छपे अपने दो कहानी-संग्रहों ‘दर्द मांजता है…’ और ‘दिल है छोटा-सा’ से उन्होंने अपने पाठकों के मन में रणविजय के लेखन को और अन्वेषित करने की चाह जगाई है। एक लेखक के रूप में रणविजय अपनी कला और कथ्य के लिए सजग हैं। वे अपनी रचनाओं में लगातार विषय एवं संवेदनाएँ परिवर्तित करते जा रहे हैं, जो उनके लेखन के ही फलक मात्र को विस्तार नहीं देते वरन पाठकों को भी कुछ नया प्राप्त होता है। प्रस्तुत कृति उनका पहला उपन्यास है। यह उपन्यास ज़्यादातर वास्तविक घटनाओं को कल्पनाओं से जोड़कर बुना गया है, जो बहुत कुछ सोचने को मजबूर करता है। यह पाठक को अपने आसपास हो रहे अलक्ष्य परिवर्तनों के प्रति न केवल सशंकित करता है, अपितु उन्हें सचेत दृष्टि रखने के लिए जागरूक भी करता है। इसमें वर्णित दाँव-पेंच, पर्दे के पीछे होने वाली घटनाएँ हैं। अपनी ख़ुफ़िया संस्थाओं एवं उनके ऑपरेशनों पर आधुनिक राष्ट्र बहुत सारा धन क्यों ख़र्च करते हैं तथा क्यों होना चाहिए जैसे विषयों पर समझ बनाने में यह किताब मदद करती है।.
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