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| Publisher | Yuvaan Books |
| ISBN-13 | 9788169235433 |
| ISBN-10 | 816923543X |
| Binding | Paperback |
| Edition | 2026 |
| Number of Pages | 146 Pages |
| Language | (Hindi) |
| Subject | World History |
सभ्यताओं का विकास बगैर घुमक्कड़ों के इस तरह नहीं हुआ होता। समुद्रों, पर्वतों और विशाल मरुस्थलों से घिरे हुए भू-भाग के लोग अपने आसपास को ही पूरा संसार समझते हुए अपनी ही जगह पर एकरस जीवन जीते हुए ख़त्म हो जाते। ना दक्षिणी ध्रुव के बर्फीले क्षेत्र में रहने वाले अफ्रीका के गर्म क्षेत्रों को जान पाते, न भारत के बारे में अमेरिका और यूरोप के लोगों को पता चलता। ये उन जुनूनी घुमक्कड़ों की वजह से हुआ कि संस्कृतियों, वस्तुओं और सामाजिक विविधताओं का सारी दुनिया में एक दूसरे से परिचय, आदान-प्रदान हुआ। महाघुमक्कड़ राहुल सांकृत्यायन ने सरस और मनोरंजक शैली में लिखे इस शास्त्र में घुमक्कड़ी के सभी हिस्सों की अपने अनुभव के आधार पर विशद और तार्किक व्याख्या की है। घुमक्कड़ी के लिए घर छोड़ने की सही उम्र क्या हो, किन चीजों का ज्ञान हो, घुमक्कड़ को अपनी यात्रा में क्या करना चाहिए क्या नहीं करना चाहिए जैसे सवालों के ठोस जवाब इस शाख में मिलते हैं। इसके साथ-साथ धर्म, दर्शन, कला, घुमक्कड़ जातियों और विशेषकर स्त्री घुमक्कड़ों के लिए दिशानिर्देश इसे एक मूल्यवान ग्रन्थ बनाते हैं। यह शास्त्र हर नयी पीढ़ी को मनुष्य की शाश्वत यायावरी की याद दिलाता है और घुमक्कड़ी के लिए उकसाता है।
Rahul Sankrityayan
Yuvaan Books