एक शानदार अतीत कुत्ते की मौत मर रहा है, उसी में से फूटता हुआ एक विलक्षण वर्तमान रू-ब-रू खड़ा है-अनाम, असुरक्षित, आदिम अवस्था में । और आदिम अवस्था में खड़ा यह मनुष्य अपनी भाषा चाहता है, आस्था चाहता है, कविता और कला चाहता है, मूल्य और संस्कार चाहता है; अपनी मानसिक और भौतिक दुनिया चाहता है-' यह है नयी कहानी की भूमिका-इस कहानी को शास्त्र और शास्त्रियों द्वारा परिभाषित करने की जब-जब कोशिश हुई है, कहानी और कहानीकार ने विद्रोह किया है । इस कहानी को केवल जीवन के संदर्भो से ही समझा जा सकता है, युग के सम्पूर्ण बोध के साथ ही पाया जा सकता है । नयी कहानी के प्रमुख प्रवक्ता तथा समानान्तर कहानी आन्दोलन के प्रवर्तक कमलेश्वर ने छठे दशक के काल खंड में जीवन के उलझे रेशों और उससे उभर्नेवाली कहानी की जटिलताओं को गहरी और साफ़ निगाहों से विश्लेषित किया है । साहित्य का यह विश्लेषण बिना स्वस्थ सामाजिक दृष्टि के संभव नहीं है । कमलेश्वर की यह पुस्तक इसलिए एतिहासिक महत्त की है कि यह समय और साहित्य को प्र समग्रता में समझने की दृष्टि देती है । 'नयी कहानी की भूमिका' अपने समय के साहित्य का अत्यंत विशिष्ट दस्तावेज है; पाठकों, लेखकों और अध्येताओं के लिए अपरिहार्य पुस्तक है ।.
Kamleshwar
जन्म: 6 जनवरी, 1932 (मैनपुरी, उ.प्र.)। शिक्षा: एम.ए. (इलाहाबाद विश्वविद्यालय)। प्रकाशित रचनाएँ कहानी-संग्रह: राजा निरबंसिया और कस्बे का आदमी, मांस का दरिया, खोई हुई दिशाएँ, बयान, जॉर्ज पंचम की नाक, आजादी मुबारक, कोहरा, कितने अच्छे दिन, मेरी प्रिय कहानियाँ, मेरी प्रेम कहानियाँ। उपन्यास: एक सड़क: सत्तावन गलियाँ, डाक-बंगला, तीसरा आदमी, समुद्र में खोया हुआ आदमी, लौटे हुए मुसाफिर, काली आँधी, वही बात, आगामी अतीत, सुबह दोपहर शाम, एक और चन्द्रकान्ता, कितने पाकिस्तान, पति पत्नी और वह। समीक्षा: नई कहानी की भूमिका, नई कहानी के बाद, मेरा पन्ना, दलित साहित्य की भूमिका। नाटक: अधूरी आवाज, चारुलता, रेगिस्तान, कमलेश्वर के बाल नाटक। यात्रा-संस्मरण: खंडित यात्राएँ, अपनी निगाह में। आत्मकथ्य: जो मैंने किया, यादों के चिराग, जलती हुई नदी। सम्पादन: मेरा हमदम: मेरा दोस्त तथा अन्य संस्मरण, समानान्तर-1, गर्दिश के दिन, मराठी कहानियाँ, तेलगू कहानियाँ, पंजाबी कहानियाँ, उर्दू कहानियाँ। सम्मान: शलाका पुरस्कार, शिवपूजन सहाय शिखर सम्मान, साहित्य अकादमी पुरस्कार।.
Kamleshwar
Rajkamal Prakashan