| Publisher |
VANI PRAKSHAN |
| Publication Year |
2026 |
| ISBN-13 |
9789373480121 |
| ISBN-10 |
937348012X |
| Binding |
Hardcover |
| Number of Pages |
352 Pages |
| Language |
(Hindi) |
| Weight (grms) |
500 |
| Subject |
Poetry |
शांत्वना दूबे तिवारी एक अत्यन्त प्रतिभाशाली और प्रेरणादायक व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने शैक्षणिक और व्यावसायिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। वर्तमान में, वे उत्तर प्रदेश सचिवालय, लखनऊ में माध्यमिक शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं। शांत्वना तिवारी राष्ट्रीय छात्रवृत्ति धारक हैं और उन्होंने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र में स्नातक और स्नातकोत्तर, दोनों परीक्षाओं में प्रथम स्थान प्राप्त कर स्वर्ण पदक हासिल किया है। शांत्वना तिवारी को अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है, जिनमें राधाकृष्णन पुरस्कार, चांसलर पुरस्कार, वर्ष 1992 में आर.एन. अय्यंगर पदक, देवी प्रसाद अग्निहोत्री पुरस्कार, पं. भगवानदास पुरस्कार और प्रोफ़ेसर टी.आर.वी. मूर्ति पुरस्कार शामिल हैं। शांत्वना तिवारी का चयन 1994 में उत्तर प्रदेश पी.सी.एस. परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद खंड विकास अधिकारी के रूप में हुआ। इसके बाद, उन्हें 1995 में उत्तर प्रदेश पी.ई.एस. सेवा के लिए चुना गया और शिक्षा विभाग में अपनी यात्रा शुरू की। शांत्वना तिवारी के व्यक्तित्व में संगीत के प्रति गहरा समर्पण है। अपनी माता की तरह, शांत्वना जी का संगीत अनुराग आत्मिक शान्ति और आन्तरिक सन्तुलन का साधन है। संगीत प्रेम के कारण इनका भजन संग्रह भक्ति सुर संगम प्रकाशित है। छात्रहित के लिए तीन पुस्तकें प्रकाशित हैं–From Mother to Mentor, एक सन्त की जीवन यात्रा, सफल छात्र बनने का रास्ता व आठ तकनीकें एवं रहस्य। *** इस पुस्तक के माध्यम से हमने न केवल इन गीतों को सँजोने का प्रयास किया है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों तक उत्तर प्रदेश की इस सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने की एक छोटी-सी पहल भी की है। इस पुस्तक के गीतों की रचना मैंने स्वयं नहीं की है, अपितु इन्हें उत्तर प्रदेश के लोकगीतों की कई लुप्त हो रही पुस्तकों से संग्रहित किया गया है। इस पुस्तक से मैंने उत्तर प्रदेश के लोकजीवन में रचे-बसे उन अवधी गीतों को संकलित करने का प्रयास किया है, जो हमारे सामाजिक और सांस्कृतिक ताने-बाने को जीवन्त बनाते हैं। यह गीत केवल शब्द नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही भावनाओं, परम्पराओं, संस्कारों और लोक श्रद्धा की जीवन्त गाथाएँ हैं। हमारा उद्देश्य केवल गीतों को प्रस्तुत करना नहीं, बल्कि उनके पीछे छिपी सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक सन्दर्भ और मानवीय संवेदनाओं को भी पाठकों तक पहुँचाना है। विवाह हो या जन्म, ऋतु हो या आराधना, हर अवसर पर गाये जाने वाले इन गीतों में हमारे ग्रामीण समाज की मासूम मुस्कानें, श्रद्धा, उल्लास और जीवन-दर्शन समाहित है। यह पुस्तक केवल अवधी लोकगीतों का संकलन मात्र नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक चेतना का एक प्रामाणिक और भावनात्मक प्रतिबिम्ब है।
Shantvana Dubey Tiwari
Shrikant Shukl
Shantvana Dubey Tiwari
,Shrikant Shukl
VANI PRAKSHAN