स्मृतियाँ कभी नहीं मरतीं
स्मृतियाँ कभी नहीं मरतीं युवा कवि अमरजीत राम का पहला संग्रह है लेकिन इस संग्रह में ही वे एक तपे हुए प्रौढ़ कवि के रूप में हमारे सामने उपस्थित होते हैं जहाँ स्मृतियों की जीवन्त उपस्थिति और वर्तमान का जीवित बोध इस क़दर मौजूद है कि इस कवि के संवेदनात्मक ज्ञान पर आश्चर्य होता है। संग्रह में माँ, पिता के साथ उनके जीवनाधार मड़ई की जीवन्त उपस्थिति तो है ही साथ में बुद्ध, कबीर, रविदास, गोसाल, अछूतानन्द, फुले व अम्बेडकर भी मौजूद हैं जिनसे कवि का वजूद बनता है और हर नाउम्मीदी के ख़िलाफ़ कवि अपना स्वर बुलन्द करता है।
संग्रह में परिवार से लेकर दलित समाज तक की भोगी हुई विकराल स्थितियाँ तो दर्ज हैं ही उनको बदलने की एक अनिवार्य आकांक्षा भी मौजूद है जो कवि की जिजीविषा की साक्षी है। यहाँ सत्ता व सामन्ती व्यवस्था के तले पिसती हुई जनता की पीड़ा के साथ उसका पराक्रम भी अभिव्यक्त हुआ है जिससे ये कविताएँ भव की नाना रूपात्मक स्थितियों से गुज़रती हुई पराभव की हर स्थिति का प्रतिकार करती हैं।
यहाँ संकलित कविताएँ मुर्दों के गाँव का मुर्दों के देश में रूपान्तरित होने की साक्षी हैं जहाँ भूख की घनीभूत छाया में ये कविताएँ फेन की तरफ़ उतराती हैं और पूरी व्यवस्था के सम्मुख एक बड़े प्रश्न के रूप में खड़ी होती हैं।
अच्छी बात है कि अमरजीत राम का कवि पूरी शोषण व्यवस्था के ख़िलाफ़ तनकर खड़ा होता है और फूलों के खिलने के माध्यम से जीवन रस का संचार करता है। यह प्रकृति की ऊर्जा व गति का प्रभाव ही है कि बुरे वक़्त में भी यह कवि एक पत्थर को जल की गहराई में उतारता है और ठहाके लगाते हुए बाढ़ का सौन्दर्य शास्त्र लिखता है।
संग्रह में कवि के जीवट का पता देती संघर्षजन्य कई कविताएँ हैं जिनका विस्तार कवि के बचपन से लेकर कोरोना की विभीषिका तक है। कहीं घास के रूपक के माध्यम से लघुता को महत्त्व देती कविताएँ हैं तो कहीं ठनकती थाली के माध्यम से भूख पर विजय का आवाहन है। संग्रह में रोपनहरी, गुब्बारों वाली लड़की, मुसहर स्त्रियाँ, छन्नूलाल जैसे निम्नवर्गीय चरित्र आधारित कविताएँ हैं और इसी पृष्ठभूमि पर मटके की चीख़, अवमूल्यन, कोहरा में गोहरा, चूल्हे में अकाल जैसी मार्मिक कविताएँ भी हैं जिनमें चिन्तनशील भाषा के दायरे में एक सशक्त श्रमजीवी स्त्री स्वर भी मौजूद है–'स्त्रियाँ राख नहीं राग होती हैं'।
कह सकते हैं कि मानवीय संवेदन तन्त्र को झकझोरती अमरजीत की ये कविताएँ हमारे समय में कविता की भाषा व उसकी सामाजिकता का एक बड़ा परिसर निर्मित करती हैं।
कवि को इस संग्रह के लिए बधाई।
–श्रीप्रकाश शुक्ल
Amarjeet Ram
अमरजीत राम
जन्म : 5 जुलाई, 1983 गाजीपुर जिले के गैबीपुर गाँव में।
शिक्षा : एम०ए० (हिन्दी), पी-एच० डी० काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी ।
प्रकाशित कृतियाँ : नागार्जुन की सौन्दर्य चेतना (आलोचना); कविता संग्रह : प्रकाशाधीन; संपादक : अनभै साँच; सह-संपादक : वर्ल्ड ट्रांस्लेशन; लिप्यन्तरण : रामविलास शर्मा की आलोचना दृष्टि - अजय तिवारी, प्रगतिशील काव्यधारा और नागार्जुन का साहित्य-मैनेजर पाण्डेय।
प्रतिमानों के साँचे में दलित विमर्श, छायावाद एक पुनर्विचार पुस्तक में शोध आलेख प्रकाशित, तिमिर में ज्योति जैसे - अरूण होता द्वारा संपादित पुस्तक में कविताएँ।, असहमतियों के वैभव के कवि श्रीप्रकाश शुक्ल- कमलेश वर्मा, सुचिता वर्मा, द्वारा संपादित पुस्तक में कविताएँ।, चर्चित कविता 'मुसहर स्त्रियाँ' नीलेश देशमुख द्वारा मराठी भाषा में अनुदित एवं प्रकाशित।, 'व्यथा कौवे की' कविता समीक्षा प्रो० अरूण कुमार द्वारा।, समग्र कविताओं पर डॉ० आशीष कुमार, डॉ० अनिल कुमार पाण्डेय और डॉ० आशीष कुमार यादव की समीक्षा।, साक्षात्कार : सुशीला टाकभौरे से अमरजीत राम की बातचीत (वर्तमान साहित्य)। ; आकाशवाणी, राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय मंचों पर काव्यपाठ एवं वक्तव्य।,
विशेषज्ञता : दलित विमर्श, मध्यकालीन काव्य, आधुनिक काव्य, आलोचना।
प्रकाशित शोध आलोख 28 : शोध हस्तक्षेप, संभाष्य, नागरीप्रचारिणी, काशिका, अनभै साँच, अनामिका, विमल विमर्श, कश्फ़, संस्कृति, वर्ल्ड ट्रांस्लेशन, जर्नल ऑफ ह्यूमैनिटीज एण्ड कल्चर, शोध दृष्टि, आई०जे०सी०आर० अनुकृति ।
प्रकाशित कविताएँ : परिचय, अनिश, हिमालोकिनी, चौपाल, बिम्ब-प्रतिबिम्ब, दोआबा, अनभै साँच, प्रयागपथ, दलित अस्मिता, सरस्वती, शब्द विवेकी।
पुरस्कार : कुम्भ कलश साहित्य सेवा संस्थान द्वारा वर्ष 2019 का युवा कवि गौरव सम्मान, शिक्षा जगत में विशिष्ट योगदान हेतु प्रतिभा सम्मान वर्ष 2022, बिम्ब - प्रतिबिम्ब सृजन सम्मान वर्ष 2023, अवध साहित्य अकादमी पत्रकार भवन गँधियांव, करछना, प्रयागराज द्वारा वर्ष 2023 का साहित्य साधक सम्मान, यूनिवर्सल हिन्दी साहित्य, संगीत, कला, संस्कृति अकादमी इन्दौर द्वारा वर्ष 2023 का अन्तरराष्ट्रीय एवार्ड 'यूनिवर्सल लाइट टाइम अचीवमेंट सम्मान'
Amarjeet Ram
VANI PRAKSHAN