| Publisher |
VANI PRAKSHAN |
| Publication Year |
2026 |
| ISBN-13 |
9789373483542 |
| ISBN-10 |
9373483544 |
| Binding |
Hardcover |
| Number of Pages |
224 Pages |
| Language |
(Hindi) |
| Weight (grms) |
350 |
| Subject |
Travel Writing |
एक मायावी शहर की गाथा :
आज विश्वग्राम में यात्रा करना पहले से अधिक सुगम हो गया है। सूचनाओं और जानकारियों के लिए इंटरनेट का जाल हरहमेश तत्पर है। पर मानवीय से मायावी होते संसार को अभिव्यक्त करना एक संवेदनशील लेखक के लिए अधिक जटिल। बाहर के भीतर को एक लेखक ही देख व दिखा सकता है। कथाकार लक्ष्मी शर्मा ने लेखक की इसी आँख से देख दुबई गाथा लिखी है, उन्हीं के शब्दों में योगमाया। "कुदरत और मनुष्य की मिलकर रची इस बेमिसाल जुगलबन्दी को देखते हुए मेरे दिमाग़ में पहली बार यह शब्द आया था और फिर तो दुबई मेरे लिए योगमाया ही हो गयी, जिसे माँ के शब्दों में कहें तो 'जोगमाया'। कथ्य और कहन के बीच विधाओं के बने-बनाये ढाँचों को ढहाकर लिखी यह गाथा, डायरी या यात्रा या संस्मरण या छोटी-छोटी कहानियों से बुना नॉवेला, एक नयी बुनावट व शिल्प से गुँथी यह गाथा सिर्फ़ दुबई की स्मृति का हिस्सा भर नहीं बल्कि आज के समाज के यथार्थ की खोज में उसको उसके समूचे परिप्रेक्ष्य में अभिव्यक्त करते हुए एक ग्लोबल होते गाँव की जीवनी है।"
एक ऐसा विश्वग्राम जहाँ की मूल आबादी मात्र दस प्रतिशत हो। जहाँ अपने संसाधन बहुत सीमित हों। अपनी इच्छा-शक्ति के बल पर आज की नींव पर भविष्य को देखते हुए धर्म, जाति, राजनीति से परे सबको आहूत करता है। तमाम कट्टरताओं से दूर सबके लिए पलक पाँवड़े बिछाये रहता है। विपरीत होने के बावजूद तमाम मौसमों को अपने यहाँ उतार लेने की ज़िद के बारे में लक्ष्मी शर्मा लिखती हैं कि 'मन यह देखकर एक बार दुबई की सबसे आगे रहने की ज़िद का क़ायल हो गया।'
उन्हीं के शब्दों में- "जो भी असम्भव लगता हो उसे सम्भव करके दिखाता है। "बिना तारीख के शब्दों के कैमरे में दर्ज दुबई की यह डायरी उसके भुतैले गाँव व पुरातन गलियों से होते हुए एफिल टॉवर से भी ऊँची रिहायशी इमारतों और विशाल मॉल्स तथा वहाँ रहने वाले समूचे विश्व के बाशिन्दों के साथ परदेस में भी समूचे भारत, बल्कि पड़ोसी मुल्कों पाकिस्तान व बांग्लादेश के लोगों का अपनापा भी है।
यथार्थ के साथ सृजन में गल्प के साथ ईमानदार निगाह की भी ज़रूरत होती है। लक्ष्मी शर्मा की इस डायरी का कमाल ही है कि वह पाठक के लिए यह गुंजाइश नहीं छोड़ती कि वह तनिक भी शंका करे। इनके शब्द - शब्द कैमरे की दीठ रखते हैं। इसे पढ़ते हुए पाठक बराबर लेखिका के संग उन जगहों को सिर्फ़ देखता ही नहीं महसूस भी करता है। किसी भी रचना की यही विश्वसनीयता होती है।
स्व से पर की यात्रा है यह, जहाँ निज की डायरी एक शहर के बहाने सम्पूर्ण विश्वग्राम का सन्धान करती है। इसमें दर्ज यथार्थ व वहाँ बिखरी पड़ी कहानियों को शायद यह शहर भी अब उतना नहीं टटोलता जितना लेखिका ने टटोला।
यथार्थ को फ़न्तासी और फ़न्तासी को कथा में पिरोती हुई लेखिका स्वयं को उसमें आत्मसात करते हुए कहती हैं- " दुबई प्रवास की आख़िरी रात है और मन की कैफ़ियत बयान बाहर है। रात का एक बज रहा है और मैं बालकनी में बैठी हूँ। मेरी हमराज जो कभी मेरी पुरखिन, कभी बिटिया तो कभी दोस्त बनकर मेरे साथ रही, जिसने मुझे हँसी और आँसू साझा करने लायक समझा, अपने सितारों जड़े रेशमी दुपट्टे के नीचे छुपे सादा पल्लू से मेरे आँसू भी पोंछे हैं।" लक्ष्मी शर्मा की यह पुस्तक किसी भी विधा से परे एक ऐसी यात्रा - कथा है जो सिर्फ़ वृत्तान्त नहीं है, बल्कि यथार्थ के साथ एक ऐसे सत्य का सन्धान भी है जिस पर मनुष्य का जीवन टिका है।
-सत्यनारायण
वरिष्ठ लेखक
Lakshmi Sharma
"लक्ष्मी शर्मा : जन्म: 25 जून 1964, इन्दौर। सेवानिवृत्त हिन्दी प्रोफ़ेसर। शिक्षा: एम.ए. (देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इन्दौर), एम.फिल., पीएच.डी. (राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर)। प्रकाशित रचनाएँ: उपन्यास: ‘सिधपुर की भगतणें’, ‘स्वर्ग का अन्तिम उतार’, ‘लीला’, ‘गाथा एक कुप्रसिद्ध इन्दौरी औरत की’। कहानी-संग्रह: ‘एक हँसी की उम्र’, ‘रानियाँ रोती नहीं’। विवेचना-ग्रन्थ: 'मोहन राकेश के साहित्य में पात्र-संरचना’, ‘जलप्रलय में भीगते ज्वालामुखी’, ‘मोहन राकेश के पात्र’। सम्पादन: ‘स्त्री होकर सवाल करती है’ (फ़ेसबुक पर प्रकाशित स्त्री-सरोकारों की कविताओं का संकलन आधुनिक काव्य संकलन। सम्मान: उपन्यास स्वर्ग का अन्तिम उतार के लिए वर्ष 2020 का ‘अन्तरराष्ट्रीय शिवना सम्मान, मध्यप्रदेश प्रेस क्लब द्वारा ‘मध्यप्रदेश प्रतिभा अलंकार सम्मान’ 2022। सृजन सेवा संस्थान, श्रीगंगानगर द्वारा ‘भूरीदेवी-चंपालाल बैद कथा-सृजन सम्मान’ 2023। सम्प्रति: स्वतन्त्रा लेखन। "
Lakshmi Sharma
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