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| Publisher | Rajkamal Parkashan Pvt Ltd |
| Publication Year | 2014 |
| ISBN-13 | 9788126725908 |
| ISBN-10 | 8126725907 |
| Binding | Hardcover |
| Number of Pages | 120 Pages |
| Language | (Hindi) |
| Dimensions (Cms) | 22 X 14 X 1.5 |
| Subject | Poetry |
केदारनाथ सिंह का यह नया संग्रह कवि के इस विश्वास का ताज़ा साक्ष्य है कि अपने समय में प्रवेश करने का रास्ता अपने स्थान से होकर जाता है। यहाँ स्थान का सबसे विश्वसनीय भूगोल थोड़ा और विस्तृत हुआ है, जो अनुभव के कई सीमान्तों को छूता है। इन कविताओं में कवि की भाषा और पारदर्शी हुई है—और संवादधर्मी भी। संग्रह की लम्बी कविता ‘मंच और मचान’ इस दृष्टि से उल्लेखनीय है कि यहाँ कटते हुए वृक्ष के विरुद्ध एक व्यक्ति (चीना बाबा) का प्रतिरोध ‘घर’ के लिए आदमी के बुनियादी संघर्ष का रूपक बन जाता है। यहाँ तुच्छ कीचड़ भी दुनिया बचाने के लिए सक्रिय दीखता है और घास की एक छोटी-सी पत्ती भी बैनर उठाए हुए मैदान में खड़ी है। पानी, कपास, लकड़ी और धूल जैसी छोटी-छोटी चीज़ों की बेचैनी से भरी ये कविताएँ कोई दावा नहीं करतीं। वे सिर्फ़ आपसे बोलना-बतियाना चाहती हैं—एक ऐसी भाषा में जो जितनी इनकी है उतनी ही आपकी भी।
Kedarnath Singh
Rajkamal Parkashan Pvt Ltd